Bhramar ka 'Dard' aur 'Darpan'

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शराब और ड्रग्स ने उसे लील लिया

Posted On: 17 Nov, 2011 Others,न्यूज़ बर्थ में

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शराब और ड्रग्स ने उसे लील लिया
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(फोटो साभार गूगल नेट से लिया गया )

जहां सुमति तहां सम्पति नाना !
जहां कुमति तहां विपति निधाना !!

बेटे की बचपन की शैतानियों से माँ को बड़ा प्यार था लेकिन किशोरावस्था के बाद की शरारतें माँ के मन को बेचैन करतीं थी ! उस का देर से घर लौटना अँधेरे में कई बार गिर पड़ चोट खा कर आना माँ की चिंता का सबब बनता जा रहा था ! धीरे धीरे वे उसकी हरकतों पर गौर करने लगी ! लगा की बच्चा अब बड़ा हो गया है और इसे अब अपने भविष्य के विषय में सोचना चाहिए !
किसी तरह से डिग्री की पढाई पूरी हो गयी ! कान में कुछ उडी पड़ी खबर भी आने लगी की बदनाम दोस्तों के साथ घूमना फिरना इस का जारी है ! लोक लाज का भय और बाप से हमेशा इस के विषय में छुपाये रखना माँ को अंदर ही अन्दर खोखला किये जा रहा था !

अप्रत्यक्ष रूप से बेटे को प्यार से समझाती जब फरमाईश होती तो बाप से बहाने बना पैसे भी बेटे को मुहैया कराती रहती और जितना ही उन्होंने उस को अपने आँचल में बाँधने की कोशिश की मामला बिगड़ता गया ! धीरे धीरे बातें पिता के कान तक पहुँचने लगी माँ ने भी खरी खोटी सुनी ! चिंता अब बढ़ गयी थी !
बेटा अब तो रात में शराब पी कर आने लगा ! घर में बहस बाजी झगडा झंझट बाप के साथ उलझ जाना मार पीट की नौबत क्या हाथापायी सब हो जाती ! दिन गुजरते गए लोगों ने सलाह दी बाहर कहीं भेज यहाँ के बदनाम लड़कों से संपर्क ख़त्म करें ! लेकिन माँ बाप की कौन सुनता बेटा अब जवान जो हो गया था ! २५ साल बहुत होते हैं लम्बा चौड़ा ६ फुट से भी बड़ा …….पतला छरहरा देखने सुनने में सुन्दर शरीर …लेकिन शराब और अन्य गोलियों के नशे के सेवन से जीवन का रास्ता ही बदल गया था !

लोग जो सुझाते माँ दौड़ी जाती ! पंजाब से दवा मंगाती खाने पीने में, चाय में, देती की आदत ये नशे की छूटे लेकिन सब बेकार कुछ दिन उल्टियां फिर बंद….. फिर शुरू !

फिर कुछ लोगों ने कहा की इस के पल्ले कोई सुन्दर बहुरिया बाँध दी जाए तो शायद प्यार में ये सुधर जाए ! सब को ये राह भी पसंद आ गयी शादी भी हो गयी ……….सुन्दर बहू आ गयी सौम्य सुन्दर सुशील लेकिन अब तो कोहराम मचाने पर कोई सुनने वाला, सहने वाला ,लिपटने वाला ,रोने और गिडगिडाने वाला , और जो मिल गया था ,खूंखार और हो गया सारे उपचार बेकार …
साल भर बीत गया ! प्रभु ने सुना बच्चा होने की उम्मीद से सब खुश ..! शायद बच्चे से प्रेम हो जाए कुछ करिश्मा हो और सुधार हो …..लेकिन उस के कानों में जब बात पड़ी उसने गर्भपात ही करा दिया .. बीबी को घर में सोने तक नहीं देता नीचे विस्तर लगा बेचारी सो जाती ..पर साथ निभाने का प्यारा वादा वो रस्म रिवाज उसे तो सब याद था …..बीच बचाव में चूड़ियाँ तो पहले ही टूट जाती थी ……….गहने जो कुछ थे एक एक कर सब दद्दा ले गए ……….
शराब और कबाब में …सब जाता रहा सब मूक दर्शक बन सहते रहे अपना भाग्य बना लिए .
सब फिर बेचैन …हाथ पर हाथ धरे बैठे बूढ़े माँ बाप और कौन कितना लड़े ….

अभी १३ नवम्बर २०११ रविवार की रात फिर वही सिला वही चक्र देर से खा पी आना ……झगडा लड़ाई …..हंगामा और फिर एक कमरे में घुस बंद कर लेना ….सब को डराना की आज मै जो गोली खा कर आया हूँ …अब मुझको कोई नहीं बचा सकता …फिर खुद को कमरे में बंद कर लेना ….रोज रोज ऐसी बातें सुन लोगों का विश्वास उठ चला था कितना सच कितना गलत पता नहीं …. ब्लैकमेलिंग की आदत तो पड़ ही चुकी थी ……..

लेकिन आज उसकी चेतावनी झूठ नहीं थी ……..उसने खुद को फांसी के फंदे से करीब रात ११ बजे ही लटका लिया था .और शराब ने उसे लील लिया था ….

….रात से ही हंगामा रोना पीटना …माँ पर दौरे पड़ना ……..पत्नी का मिटटी का तेल पी जान देने की कोशिश …अस्पताल में भर्ती……..पुलिस मीडिया रिश्तेदार ……आज तक किसी को अब उस घर नींद नहीं भागे भागे फिर रहे …………….
अब ये खबर आई की पत्नी के पेट में फिर बच्चा है ……..अगर मिटटी के तेल का असर न हुआ तो शायद बच जाए ………..
माँ को सपना आया मै फिर लौट कर इस घर में आऊँगा ……….पागलपन ….सब आ गए दद्दा नहीं आये बस कहती जाती …
मेरे दद्दा भगवान् को प्यारे हो गए शराब ने नशे ने उसे लील लिया ………यही बार बार दुहराना शायद अब उसकी किस्मत …………..

ये रायबरेली उत्तर प्रदेश के निवासी एक श्रीवास्तव परिवार की सच्ची घटना है …बाप अब रिटायर है …माँ बूढी घर में है …..एक बहिन की शादी हो चुकी है ………
एक अभी भी कुंवारी है …..और भाई की आदतों से तंग आ गाँव में रह कर शिक्षा मित्र बन बच्चों को पढ़ाती है गाँव से ये सुन दौड़ आकर भाई से मिली यातनाएं भूल.. फूट फूट कर रो पड़ी ..बचपन के दिन…….. राखी की यादें……….. एक ही भाई ….सब तार तार हो गया … मेरे दद्दा ……मेरे दद्दा …….मेरे राहुल ..राहुल अभी नहीं आया ……
और मेरी आँखें भी भर आयीं …क्षमा करिए अब लिख नहीं सकता ….उस आत्मा को श्रद्धांजलि और सब को सहने की शक्ति दें भगवान्
भ्रमर ५
१४.११.२०११
यच पी

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47 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

vinitashukla के द्वारा
November 29, 2011

मर्मस्पर्शी और विचारोत्तेजक लेख. बधाई भ्रमर जी.

    surendra shukla bhramar5 के द्वारा
    November 30, 2011

    आदरणीया विनीता जी इस दर्द और मर्म ने आप के मन को छुवा और समाज की ये हाल देख विचार करने को प्रेरित कर सकी ये रचना सुन हर्ष हुआ आभार भ्रमर ५

Rajkamal Sharma के द्वारा
November 19, 2011

आदरणीय भ्रमर जी …..सादर प्रणाम ! आप इस रूप में भी छा गए हो , यह फिल्म सुपर हिट जा रही है ….. सभी लोग भ्रमर को इस नए गेटअप+ नए रोल में देखने के लिए मरे जा रहे है ….. आपने मुझको फेसबुक पर कैसे ढूंड निकाला ?….. हैरान हो गया हूँ आपकी खोजबीन को देख कर !!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!

    surendra shukla bhramar5 के द्वारा
    November 20, 2011

    प्रिय राज भाई जैसे वासुदेव जी की छाती पर बजरंग बलि की कृपा हुयी वैसे ही आप सब के प्यारे लेख और दुवाओं का असर भ्रमर पर क्यों न हो ? अपना स्नेह बनाये रखें चेला बना लें …ह हां मित्रों की खोज में ..फेस बुक पर भी सफलता मिली …अभी प्रतिबन्ध लगा है बहुत ज्यादा अनजाने मित्र बनाने का भी दंड भोग रहा हूँ ..साहित्य स्कूल मीडिया फिल्म कार न जाने और कितने.. ..गूगल महाराज पहले ४ दिन फिर ७ दिन अब न जाने कितने दिन दंड ? ..अब गूगल प्लस बाकी है ……..नेट लोग और न जाने क्या क्या सब जगह आप की कृपा से हूँ बहुत से प्रिय जन हैं ..बहुत सारे मित्र तीसरी दुनिया …जय श्री राधे भ्रमर ५

nishamittal के द्वारा
November 19, 2011

शुक्ल जी,बहुत मार्मिक और शिक्षा प्रद आलेख परन्तु अफ़सोस शिक्षा कोई नहीं लेता.

    surendra shukla bhramar5 के द्वारा
    November 19, 2011

    आदरणीया निशा जी रौशनी दिखाना और इस तरह की घटनाओं से सीख लेना अपना काम है अब अगर कोई नजर अंदाज करे शिक्षा न ही ले तो प्रभु ही उसका खैर करे … किसका नुक्सान नहीं करेगा वो पहले तो अपना फिर समाज और देश का भी कर जाएगा … आभार आप का भ्रमर ५

Ramesh Bajpai के द्वारा
November 19, 2011

प्रिय श्री शुक्ल जी कल से कई बार प्रयास किया पर कमेन्ट पोस्ट नहीं हुआ | बहकते कदम व नशे के हश्र पर आधारित यह घटना बहुत ही भाव पूर्ण है | सबक लेना चाहिए | बधाई

    surendra shukla bhramar5 के द्वारा
    November 19, 2011

    आदरणीय बाजपेयी जी ऐसा बहुधा होता है जितना ही वक्त हमारे पास कम होता है उतनी ही समस्या … ऐसे ही हम आप की पोस्ट जो बेकार की प्रतिक्रियाओं के बारे में जे जे को लिखी गयी थी, पर अटक गए थे शायद नहीं ही पोस्ट कर पाए … सच कहा आप ने बहकते कदम से सबक ले आगे सुधार करना चाहिए …धन्यवाद भ्रमर ५

    Nettie के द्वारा
    December 13, 2011

    Inigshts like this liven things up around here.

allrounder के द्वारा
November 18, 2011

भ्रमर जी , नशा एक ऐसा सामाजिक अभिशाप है जो अब तक न जाने कितने लोगों को समय से पहले काल कलवित कर चुका है फिर भी लोग इसका मोह नहीं छोड़ ते भले ही उन्हें इसके लिए खुद की और खुद से जुड़े कई जीवनों की आहुति ही देनी पड़े !

    surendra shukla bhramar5 के द्वारा
    November 19, 2011

    बिलकुल सच कहा सचिन भाई आप ने सब कुछ जानकार जब हम अंधे बने रहें और जो कुछ कर रहे हैं उसे जायज ठहराएं जो आप को बचाने जाए उसे ही बेवकूफ बना दें तो उस घर परिवार उस शिकार को भगवान् ही बचाएं …क्या किया जा सकता है ? आइये सब अभिभावक होश में रहें ..इस अभिशाप से बचें … आभार भ्रमर ५

akraktale के द्वारा
November 18, 2011

आदरणीय भ्रमरजी नमस्कार, बहुत दिनों बाद आप के ब्लॉग पर आलेख देखा तो लगा ही था कुछ ख़ास होगा. बुराइयों को ढंककर रखने से वे तेजी से बढती हैं, किन्तु माँ का कोमल मन करे भी तो क्या. ये एक रायबरेली की कहानी नहीं है अब तो ये देश के कोने कोने के कई गाँव की कहानी बन चुकी है पहले तो नशे के लिए शायद सिगरेट और शराब जैसी ही वस्तुएं थी आज तो हमारी कल्पनाशीलता के बाहर है की नशे के लिए क्या प्रयोग में लाया जाएगा.पहले नशे के पैसों का इंतजाम घर से पैसे चुरा कर या घर का सामान बेचकर किया जाता था किन्तु आजकल इसके इंतजाम के भी अनगिनत तरीके हैं. बहुत ही मार्मिक और प्रेरणादायक आलेख.धन्यवाद.

    surendra shukla bhramar5 के द्वारा
    November 19, 2011

    प्रिय अशोक जी बिलकुल सच कहा आपने नए नए तरीके नशे के ईजाद किये जा रहे हैं नौजवानों बच्चों लड़कियों को इसमें फंसा कर के न जाने क्या क्या कराया जा रहा है ब्लैक मेल करने का ये बहुत अच्छा तरीका है और घर परिवार समाज देश को तितर वितर करने का …सारा कुछ अपने हाथ में नहीं की सुधार दिया जाए पर जितना भी हम सब के वश में है आइये करें .. आप ने बहुत ही अच्छी प्रतिक्रिया दी बिलकुल सटीक .जिसने दर्द को महसूस किया हो वही ये लिख सकता है ..बहुत ही चिंता का सबब है …माँ भी जानकर तो कुछ नहीं करती —प्रेम और भाग्य ….लेकिन हम गुहार तो माँ बाप से ही लगा सकते हैं न ? आभार आप का भ्रमर ५

alkargupta1 के द्वारा
November 18, 2011

शुक्ला जी , पढ़ते-पढ़ते मन भारी हो गया बहुत ही मर्म स्पर्शी कहानी हर दूसरे घर की है…..जहाँ से इसकी शुरुआत होती है अगर उसी समय ही बड़ों के द्वारा सख्त कदम उठा लिए जाएँ और फिर बच्चों की ऐसी भयंकर गलतियों पर पर्दा न डाला जाये तो शायद इस स्थिति से बचा जा सकता है……अति उत्तम रचना के लिए बधाई !

    surendr shukl bhramar5 के द्वारा
    November 18, 2011

    आदरणीया अलका जी बिलकुल सच कहा आप ने आप लोगों से अच्छा एक बच्चे के विषय में कौन जान सकता है …माँ को बहुत ही ध्यान से हर गुण दोष को देख उसके सुधार की कोशिश करनी चाहिए …अगर शुरू से ही गलत चीजों में लगाम लगे और बढ़ावा न मिले तो बहुत कुछ संभव है की हम बच्चे को सुधार ले जाएं ..सच में ऐसी घटनाएं रुला जाती है … बहुत बहुत आभार आप का भ्रमर ५

Amita Srivastava के द्वारा
November 18, 2011

सुरेन्द्र जी नमस्कार आपकी करुण कहानी पढ़कर मन द्रवित हो गया | सब कुछ समझते हुए भी कैसे मति मरी जाती है जो व्यक्ति इस व्यसन मे फंस जाता है . भगवान सबको सद्बुधि दे |

    surendra shukla bhramar5 के द्वारा
    November 18, 2011

    अमिता जी अभिवादन और आभार सुन्दर वचन आप के ये व्यसन बड़ा ही निर्दयी है पहले सुरूर चढ़ता है मजा आता है आनंद दाई पार्टी क्लब और बहुत कुछ धीरे धीरे न जाने क्या क्या पी कर जान ले लेना कर्ज में डूब जाना शरीर और मन से बेकार हो जाना घर परिवार को तवाह कर देना …आर्थिक क्षति बहुत कुछ .. भगवान् सद्बुद्धि दे और माँ बाप भी जागें …करुणा क्या अमिता जी रोना आ जाता है ….. धन्यवाद समर्थन हेतु भ्रमर ५

mparveen के द्वारा
November 18, 2011

सुरेंदर जी नमस्कार, बचपन में बच्चे की शरारतें अछि तो लगती हैं पर वो सिर्फ शरारते रहे ये देखना तो बड़ो का काम है अगर वो शरारते आदत का रूप धारण कर लें तो फिर…. अगर बच्चे की गलती हो तो माँ को उसपर कभी पर्दा नहीं डालना चाहिए वरना ये उसके बच्चे के लिए ही हितकर नहीं है . ये सिर्फ एक परिवार की कहानी नहीं है बल्कि बहुत ऐसे परिवार हैं जो राजा होते थे और इन सब बुरे व्यसनों के कारन खाक में मिल गए हैं … बहुत ही सुंदर आलेख बधाई हो …..

    surendra shukla bhramar5 के द्वारा
    November 18, 2011

    अगर बच्चे की गलती हो तो माँ को उसपर कभी पर्दा नहीं डालना चाहिए .. यम प्रवीण जी अभिवादन ..सच कहा आप ने ये बड़ा ही घातक सिद्ध होता है अच्छा बुरा परखना माँ का काम है कभी कभी माँ बार बार बस हिदायत देती है की इस बार किया तो ये कर दूँगी वो कर दूँगी पापा को बता दूँगी मार डाट दूँगी लेकिन करती कुछ नहीं …ये नहीं होना चाहिए ..गलत करे बच्चा तो बचपन से ही रोक लगे ..अच्छा तो पुरस्कार शाबाशी …… आभार आप का भ्रमर ५

November 17, 2011

न जाने देश में ऐसे कितने ही अभागे परिवार हैं जिनके साथ ये सब हो जाता है । कहीं ज़हरीली शराब पीने से तो कहीं अधिक पीने से…..!! जाने वाला तो चला जाता है लेकिन पीछे बिलखने वालों के दिलों का हाल कोई नहीं समझ सकता !! मार्मिक घटना का दारुण चित्रण भ्रमर जी !! :(

    surendra shukla bhramar5 के द्वारा
    November 19, 2011

    प्रिय संदीप जी सच में ये घटना हमें बहुत कुछ सिखाती है फिर भी हम सब अंधे बने रहें सरकार तो टैक्स से अपना जेब भारती रहेगी उस को किसी के मरने से क्या पड़ी है ….सच कहा आप ने …. जाने वाला तो चला जाता है लेकिन पीछे बिलखने वालों के दिलों का हाल कोई नहीं समझ सकता !!…. जब हमारी रूहें काँप जाती हैं रो पड़ते हैं तो परिवार तो …..आइये जो हमारे वश में है करते चलें आभार आप का भ्रमर ५

rita singh 'sarjana' के द्वारा
November 17, 2011

सुरेन्द्र जी , नमस्कार l आपने जो कहानी प्रस्तुत किया हैं बहुत ही कारुणिक हैं l आपको बता दू शराबीपन या ड्रग एडिक्ट होना एक बिमारी हैं l भयंकर बिमारी ,जो बहुत ही कम लोग जानते हैं ,इस संदर्भ में मैंने कई लेख और कथा भी इस मंच पर प्रस्तुत किया हैं यह सिर्फ उस भाई की कहानी नहीं वल्कि यह कहानी वह हर घर की हैं जो इस बिमारी से गुजर रहे हैं l

    surendra shukla bhramar5 के द्वारा
    November 18, 2011

    हाँ रीता जी चलिए आप की ही बात मान लें ये एक बीमारी है तो क्या ये ला इलाज है ? क्या इसके बचाव का भी कोई रास्ता है या कोई उपाय है इससे ठीक होने का ? दूसरी बीमारियों में तो कुछ रास्ता सुझाया जाता है ..हमने जो देखा है अधिक प्यार या बच्चे का बिलकुल राम भरोसे छोड़ देना ध्यान न देना अधिक दिखा बच्चे की गलतियां छिपाना और बाद में भोगना माँ के साथ पूरे परिवार को ..एक बार ये नशा लग गया तो बीमारी तो खुद बन जाता है ..जो भी हो आइये हम सब आँखें खोल चलते चलें क्योंकि एक बार ये बिगड़ गए तो गए …..आभार आप का भ्रमर ५

    rita singh 'sarjana' के द्वारा
    November 18, 2011

    सुरेन्द्र जी , नशे के लत से बचने के लिए उपाय हैं और इलाज भी बशर्ते वहा पीड़ित व्यक्ति और घरवालो का असीम धैर्य की आवश्यकता होगी l भ्रमर जी , मैं इस विषय के लेख व कथा पुन पोस्ट करती हूँ ताकि इस बिमारी के विषय में और भी लोग जाने l

    surendra shukla bhramar5 के द्वारा
    November 18, 2011

    प्रिय रीता जी बहुत अच्छा होगा इस नशे की लत के बारे में कुछ भी सार्थक जानकारी मिले और लोगों के काम आये तो सुना तो हमने भी बहुत कुछ है दवाएं भी हैं लेकिन इस शिकार हुए बालक के लिए भी कुछ प्रयोग किया था जो काम नहीं आ सका भ्रमर ५

Santosh Kumar के द्वारा
November 17, 2011

आदरणीय भ्रमर जी ,.सादर प्रणाम बहुत कारुणिक घटना को आपने अपनी लेखनी से बहुत धार सी दे दी है ,… नशा समाज को खोखला कर रहा है ,..ऐसी दुखद घटनाएँ आम हो चली हैं ,..गंभीरता से सोचने को मजबूर करती रचना ,…हार्दिक साधुवाद

    surendr shukl bhramar5 के द्वारा
    November 18, 2011

    प्रिय संतोष जी अभिवादन ..सच में ये सच्ची घटना है बहुत जगह समाज में ये आज हो भी रही है ..चिंता का विषय है हमारे अभिभावकों को बहुत ही होश और जागरूकता रख बाल बच्चों की परवरिश करनी होगी नशे का पुरजोर विरोध होना चाहिए ..आभार भ्रमर ५

rajkamal के द्वारा
November 17, 2011

प्रिय भ्रमर जी …..सादर प्रणाम ! इसमें सारी गलती माँ की ही है ….. माँ एक कुम्हार की भाँती कच्चे घड़े समान अपने बच्चे का भविष्य बना और बिगाड़ सकती है …. इसीलिए यह कहावत कही जाती है की “चोर को नहीं बल्कि उसकी माँ को मारो” अब ऐसे विकट हालात में किस बात का दुःख मनाया जाए और किस से सहानभूति प्रकट की जाए –समझ से बाहर है ….. आपको इस नए रूप में देख कर मोगाम्बो खुश हुआ धन्यवाद सहित मुबारकबाद जय श्री राधेकृष्ण

    surendr shukl bhramar5 के द्वारा
    November 18, 2011

    प्रिय राज भाई प्यार के आगे माँ भी शायद विवश हो जाती है कभी कभी मजबूर भी कहते हैं न की डोर उसके हाथों ही है शायद कोई नशेबाजी को मानसिक बीमारी बताता है कोई कुछ …वैसे जैसा की आप ने लिखा माँ की बड़ी भूमिका होती है और उसे केवल प्यार दुलार ही नहीं घड़े के सामान ठोंक पीट सुधार भी करना चाहिए तब जाकर कुछ बात शायद बन ही जाए …छिपाना तो बिलकुल नहीं चाहिए ..गलत काम पर शुरू से दंड मिलेगा तो आदत तो जरुर बदलेगी .. आप की प्यारी प्रतिक्रिया और समर्थन के लिए आभार ..मेरा रूप तो वही है कवि मन ..जल्दबाजी में ये कहानी के रूप में ये रूप भी आप को भाया उत्साहित करें तो आप का चेला बन ये भी लिखूं …ह हां जय श्री राधे भ्रमर ५

minujha के द्वारा
November 17, 2011

भ्रमर जी, आपकी इस कथा को सुनकर मेरे आगे चलचित्र सी वो घटना घूम उठी,जिसकी साक्षी मैं भी थी,अंतर बस इतना है कि इसमे लङके ने आत्महत्या कर ली और वहॉ बेचारी मॉ दुख ना सह पाने की स्थिति में चल बसी, और आज तक वो पुरा परिवार अपने अस्तित्व  को बचाने के लिए संघर्षरत है…. सोचने के लिए मजबूर करती रचना

    surendr shukl bhramar5 के द्वारा
    November 17, 2011

    प्रिय मीनू झा …आप साक्षी अगर रही हैं तो आप से अच्छा इस दर्द को कौन समझ पायेगा परिवार में कुछ भी होता है तो सारा परिवार बिखर जाता है दर्द ..समाज, पुलिस ….न जाने क्या क्या प्रभु ही बचाएं …किसी के साथ ऐसा न हो आओ प्रार्थना करें ..और पहले से चेत लें .. भ्रमर ५

malkeet singh "jeet" के द्वारा
November 17, 2011

भ्रमर जी आप लिख रहे है नाम आँखों से ,हम पढ़ रहे है नाम आँखों से ,जिनके ऊपर यह त्रासदियाँ बीतती है उन का तो परमपिता ही मालिक ‘ नशा नाश की जड़ है भाई ” इसका अंत बड़ा दुखदाई

    surendr shukl bhramar5 के द्वारा
    November 17, 2011

    प्रिय मलकीत भाई बिलकुल सत्य उदगार सब का दिल दहल जाता है और आँखें नम केवल पढने से तो परिवार माँ पिता को तो काटो तो खून नहीं ..सच कहा आप ने नशा नाश की जड़ है आइये अपने नौनिहालों पर नजर रखें और प्रभु से प्रार्थना करें की वे हमें सफल करें भ्रमर ५

Paarth Dixit के द्वारा
November 17, 2011

आदरणीय सुरेन्द्र जी , नमस्कार सच में बहुत मार्मिक घटना..ये बात पूर्ण रूप से सत्य है कि शराब धूम्रपान और ड्रग्स एक धीमे ज़हर कि तरह इंसान को खोखला कर देती है..एक गंभीर विषय पर समाज को अच्छा सन्देश देता आपका लेख.. अच्छे लेख के लिए आभार…

    surendr shukl bhramar5 के द्वारा
    November 17, 2011

    प्रिय पार्थ दीक्षित जी बहुत बहुत आभार आप का सच में ये घटना दिल दहला देने वाली है जब हमें ऐसा लगता है तो जिसका बेटा खोया उस पर क्या बीतती होगी प्रभु ही जाने धन्यवाद भ्रमर ५

November 17, 2011

दरअसल ये दुनिया अंधी-बहरी है. किसी को कुछ सुनाई नहीं देगा. चलिए, हम अपना ही भला कर लें. मानवता पर वो भी कोई छोटा उपकार नहीं होगा.. श्रेष्ठ विषय पर बढ़ने के लिए बधाई, एवं धन्यवाद..!

    surendr shukl bhramar5 के द्वारा
    November 17, 2011

    प्रिय टिम्सी मेहता जी अभिवादन, सच में ऐसे ही क्रोध उपजता है इस संसार और समाज के प्रति जो सब बर्बाद करने पर तुले हैं पहले फ्री में पिलाते हैं फिर सब बेंचवाते हैं घर बार … आभार आप का भ्रमर ५

abodhbaalak के द्वारा
November 17, 2011

भ्रमर जी अत्यंत मार्मिक घटना को आपने ……………., काश प्यार में पद कर पहली गलती को ही न छुपाया जाए और …………., किसको दोष दें, किस्मत को या ……….. http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

    surendra shukla bhramar5 के द्वारा
    November 17, 2011

    प्रिय अबोध बालक जी अभिवादन — दोष किस को दें आज तक आदमी ये नहीं समझ सका केवल बचने बचाने के तरीके अजमाता रहा बस …प्रभु की लीला प्रभु ही जाने …अपने हाथ तो क्या है ? आँखें खोल अपने नौनिहालों को रास्ते पर लाने की कोशिश बस ….आभार आप का भ्रमर ५

shashibhushan1959 के द्वारा
November 17, 2011

मान्यवर भ्रमर जी, सादर. बच्चा आता है धरती पर ख़ुशी बिखर जाती है, उम्मीदों की नयी कली सबके मन खिल जाती है. माता-पिता सोचते हैं यह ऊंचा नाम करेगा, अति कर्मठ – उद्योगी होगा सबके कष्ट हरेगा. एक चूक सारी आशाएं धुल-धूसरित करतीं, वृक्ष सूख जाता है केवल बच जाती है धरती. . द्रवित करने वाली रचना.

    surendra shukla bhramar5 के द्वारा
    November 17, 2011

    प्रिय शशि भूषण जी सटीक आप के कथन …काश इस चूक को माँ बाप संरक्षक बचा सके और एक जीवन बच जाए और अपना भविष्य भी बच सके ….आभार आप का .भ्रमर ५ एक चूक सारी आशाएं धुल-धूसरित करतीं, वृक्ष सूख जाता है केवल बच जाती है धरती.

Tamanna के द्वारा
November 17, 2011

बचपन की गलतियां नजरअंदाज करना आगे चलकर बहुत भयानक परिणाम पैदा कर सकती हैं. अभिभावकों को अपने बच्चे को सही रास्ता दिखाने का कार्य बड़ी सावधानी से करना चाहिए. ..मार्मिक प्रसंग…….

    surendr shukl bhramar5 के द्वारा
    November 17, 2011

    तमन्ना जी सच कहा आप ने बचपने में बच्चे मिटटी के घड़े जैसा होते हैं उन को बराबर ठोंक पीट कर सही रास्ते में लाना चाहिए थोड़ी सी असावधानी बाद में माँ बाप को तवाह कर देती है … सुन्दर प्रतिक्रिया भ्रमर ५

Piyush Kumar Pant के द्वारा
November 17, 2011

नशा शुरू में लोगों को आकर्षित करता है.. जैसे की एक कहावत है की जो घर नहीं देखा वही अच्छा……. अर्थात जिसका हमें ज्ञान नहीं होता है हमारी नजर में वो बड़ा ही महत्वपूर्ण होता है… उसी तरह शराब पिए आदमी को देखकर अक्सर युवा लोग ये सोचते है.. की पता नहीं इसके सेवन से कैसा आनंद आता है….. और वो इसे आज़मा कर देखने के लिए पीते हैं….. फिर शराब ही उन्हें पीने लग जाती है….. इस मानव जीवन से आनंददायी कुछ भी नहीं…… इसे यूँ व्यर्थ करना मुर्खता है…… अच्छे लेख के लिए आभार…..

    surendr shukl bhramar5 के द्वारा
    November 17, 2011

    प्रिय पीयूष पन्त जी बहुत सुन्दर और विचारणीय विचार आप के काश लोग इस तरफ ध्यान दें लोग भटकने बिगाड़ने में लगे रहते हैं पहले तो फ्री में पिलाई जाती है जब नशा हावी तो घर बार बेंच कर ले जाओ या मार खाओ .. जब शराब उन्हें पीने लगी ..किसी के रोटी खाने की भी हिम्मत नहीं तो आगे प्रभु ही मालिक ………. आभार आप का भ्रमर ५

Rajesh Dubey के द्वारा
November 17, 2011

पतन का बीज जब बृक्ष बन जाता है तब पता चलता है, कि गलती हो गई. बहुत बढ़िया रचना

    surendr shukl bhramar5 के द्वारा
    November 17, 2011

    प्रिय राजेश दूबे जी अभिनन्दन आप का …शायद पहली मुलाकात …सटीक उदगार आप के …पतन के बीज वृक्ष बन जाते हैं तो ही हमारी आँखें खुलती हैं ..यहीं हमारे अभिभावक धोखा खा जाते है अपने नौनिहालों की देख रेख उन्हें समझने में … आभार भ्रमर ५


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