Bhramar ka 'Dard' aur 'Darpan'

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शनि ग्रह -कटा-पेड़

Posted On: 21 Nov, 2011 Others,न्यूज़ बर्थ में

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शनि ग्रह -कटा-पेड़

स्थानीय देवता के कारनामे ..
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चामुंडा देवी के पास जहां लोगों का दाह संस्कार किया जाता है कहते हैं की साल में २६५ दिन होते हैं तो २६४ लोग नहीं आते बल्कि ज्यादा ही २६६ तो आ ही जाते हैं ..ऊंचे नीचे पहाड़ .गहरी खाइयां ..कहीं दो पहाड़ के बीच बाँध जल से भरे काल दीखते हैं …अपने गंतव्य पर जा कर आ जाइये तो रात में लगता है गंगा में जौ बो के उपजा लिए ..

.ये सब रात में फिर भी भूत बन छाती पर चढ़ कर दबाते हैं …जोर से चीख और रोना आ जाता है शायद पड़ोस वाले सुनते ही हों ..लेकिन किसे होश सब जाम टकराए पैग लगाए ..इन हिमालय की वादियों में पड़े ..अब उन्हें क्या पड़ी हम सा रात रात भर जागें ??

अभी चार दिन पहले चार लोग कन्धा दिए किसी सज्जन को लिए चले गए इसी मेरे भवन के सामने से इसी गाँव से ..पीछे भारी भीड़ ..राम नाम सत्य है ..ये सत्य देखने कौतूहल वश मै भी निकला हाथ जोड़े हालांकि कुछ सत्य ख़ास नहीं दिखा वही सदियों का कहा सुना ..फूल माला ..भीड़ ..सब का फेंक कर आना – मुह में लकड़ी डाल –सर फोड़ .और ….
फिर पुनः अन्दर आ अपने काम में तल्लीन हो गया ….
चार दिन भी नहीं बीते की कल शुक्रवार को फिर कोई चल बसे इस दुनिया से न जाने सब का मोह क्यों भंग हो जा रहा ?…भीड़ ..फिर मै निकला अपने भवन से राम नाम सत्य है गाया और हाथ जोड़ अन्दर घुस आया …..

आज शनिवार पता चला कल जाने वाले बाबा यहीं मेरे सामने यानी पड़ोस के भाई जी के पिता थे जो दुसरे भाई के हिस्से बँटे थे पहाड़ों में ऊपर घर में रहते थे …..मेरे घर के सामने दायीं तरफ वरामदा और उसके आगे १५ फीट चौड़ी सडक ….फिर उन भाई जी का कोसी का पेड़ लम्बा ५० (पचास) फुट ऊंचा ..कुछ लोग सहयोगी आये रस्सी बाँधी गयी हरे पेड़ में और आराकसी पावर कटर लग गया ….मोटा पेड़ करीब एक मीटर परिधि का ……

मै अपने काम में व्यस्त ..जब लग जाओ तो भूख प्यास भी भूल जाती है …बच्चा मन कौतूहल तो बहुत हो रहा था की जा के देखूं पेड़ कैसे कट रहा …….

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कहते हैं शनि महराज घूमते रहते हैं और कुछ अच्छा पुण्य काम भी देखते हैं ——-बही खाता लिखते हैं—– काले काले हैं पर मन के नहीं तन के बस ……शायद आये उड़े हमारे आस पास अब हमारे तीसरी आँख तो नहीं की उन्हें कुछ देखें ….
.हम तो दर्शन कर रहे थे हजरत निजामुद्दीन औलिया का अब्दुल रशीद जी के ब्लॉग पर कुछ शिकवा शिकायत भी …..कुछ यादें जुड़ जाती हैं हमारे साथ हमेशा के लिए …दुवाएं ले हम अब पधारे ..

“राजकमल इन पञ्चकोटि महामणि कौन बनेगा करोड़पति” !!! में जहां की हमारे भ्राता श्री मशगूल थे पांच करोड़ पति बनने में ..आज कल कोई पांच अरबवां बच्चा बनना चाह रहा तो कोई पांच करोड़ का पति ……आनंद में हम खोये ही थे कि …….

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जोर का धमाका बिजली कौंधी और अरा . र.. रा ..कि धडाम कीआवाज ..अब मुझसे नहीं रहा गया मन बेचैन सोचा बाहर निकलूँ …तो कैसे निकलूँ बड़ा भारी हरा भरा पेड़ डालियाँ पत्ते मेरा दरवाजा छत वरामदा घेरे ……..गाडी कि पार्किंग में पूरा सोया पड़ा …साथ में चार बिजली के खम्बे धराशायी ..केबल और ब्राड बैंड का मोटा केबल टेलीफोन का खम्बा सब …………….
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सारा कुछ शांत …एक मोटर साईकल सोयी पड़ी ….इस पर सारे बिजली के तार …..सवार दूर गिर कर छिटक गया था शायद उसने भी शनि के लिए कभी काली गाय को रोटी या सतरंगी खिचड़ी खिला दी होगी ….

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मै अवाक ..हतप्रभ ….भला हो शनि का अगर आ उन्होंने हमको नापा जोखा नहीं होता और ये बिजली का तार उसका कोण ४५ डिग्री नहीं कर देता ९० डिग्री होता तो पूरे के पूरे २५ फीट हमारे ऊपर ..और मेरे भवन के पूर्व और दक्षिण का एक कोना तोड़ते हुए वृक्ष महाराज ……गाडी पार्किंग की जगह में …….अब आप हालात समझ “भ्रमर” को कुछ और दुवा दे ही दीजिये ….हम आप सब के पहले से ही आभारी हैं …………. आप सब का आशीष ही रहा की मै कौतूहल से भरा वरामदे में नहीं निकला था जहाँ की अक्सर गुन गुनी धूप के लिए चहल कदमी करता हूँ
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फिर जब हम बाहर झाँके-निकले .
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…गधे की सींग से गायब रस्सी थामने वाले लोग आये रस्सी टूट विखर गयी थी ..कुछ और लोग फिर भीड़ ..बिजली वाले को फोन ….बिजली वालों कि उछल कूद यफ आई आर कि धमकी …उपप्रधान प्रधान का आना सब मिल समझाना ..सडक पर भीड़ ..रास्ता बंद न जाने क्या क्या हंगामा ..पावर कटर वाला फिर नहीं चेहरा दिखाया गाँव वाले मिल जुल आरा कशी ..
जब सारे लोग एक किसी के ऊपर पिल पड़ें तो उसे भगवान् ही बचाएं…इस हरे भरे पेड पर अक्सर नजर ठहरती थी ..अच्छा लगता था … हरा भरा पेड़ पट्टियां धूल चाटती मुरझाती ….दिल में दर्द भर गया ..बोटी बोटी काट उसे अलग कर डाले …..j

.फिर रात भर अँधेरे ठण्ड में काटना दुसरे दिन रविवार बिजली आई …
जय हो शनिदेव आप साढ़ेसाती ही नहीं चढाते जान बचाते भी हैं ..शनि का दिन स्कूल की छुट्टी हो चुकी थी आधे दिन पर ही नहीं तो इतने बच्चे इस राह पर …न जाने कितना बड़ा हादसा हो जाता …..प्रभु सब का खैर करें ………..

पेड़ काटने वाले कृपया ध्यान रखें …

१- आप भीम नहीं हैं की कुछ भी थाम लेंगे सड़ी गली रस्सी लेकर ..अच्छी मजबूत रस्सी लें
२-बिजली के खम्बे– तार हों– तो बहुत सावधानी बरतें अच्छा हो बिजली वाले को थोड़ी देर के लिए बात कर मना लें …..और बिजली काट दी जाये आज कल तार के इतने जाल बिछे हैं की एक लाईन ट्रिप भी हुयी तो दूसरी से कनेक्शन चालू रहता है ….

३-काटते समय पेड़ को जिस तरफ गिराना है उस का सही आंकलन करें उस तरफ पहले कुछ कटाई करें -अधिक ऊंचाई से न काटें
४- यदि पास भवन हैं तो नजरअंदाज न कर घर वाले को बता दे –पेड़ कभी भी काबू से बाहर हो घूम जाता है -अच्छा हो पहले डालियों की छंटनी कर लें
५-यदि पास में सड़क या रास्ता है तो उधर किसी को खड़ा कर दें राहगीरों को बचाने हेतु
६- जब पेड़ लगभग कट चुका हो थोड़ा बाकी हो तो रस्सी से ही आजमाइश कर लें पेड़ के पास से हट जाएँ रस्सी लम्बी हो और ऊंचाई और मजबूत जगह पर बंधी हों
७- आज कल कुछ स्टील के तार और पुल्ली-विन्च मशीन से उपकरण प्रयोग में लाये जा सकते हैं जो आस पास किसी ठेकेदार के पास मिल जाते हैं -जिससे धीरे धीरे इतना कस देते हैं की पेड़ महराज बिना पूरा कटे ही जय श्री राम ….

और “भ्रमर ” जैसे बच्चों का जो की सदा कौतूहल से भरे कुछ घटना में देखने दौड़ जाते हैं को विशेष रूप से बचाएं -खुद को भी बचाएं क्यों की हरा पेड़ काटना जुर्म है इसकी इजाजत ऐसे वाकये में लेनी होती है !
शुक्ल भ्रमर ५
१३.११.२०११
यच पी

दे ऐसा आशीष मुझे माँ आँखों का तारा बन जाऊं

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26 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

akraktale के द्वारा
November 22, 2011

भ्रमरजी नमस्कार, एक तो गैर कानूनी कृत्य उस पर भी किसी की जान से खिलवाड़ बहुत ही जघन्य अपराध है. आपने सावधानियों पर भी लिखा है जरुरत है बोलने की हम गुमसुम देखते रहेंगे तो फिर मुश्किल हो जायेगी. विस्तृत जानकारी की लिए धन्यवाद.

    surendra shukla bhramar5 के द्वारा
    November 23, 2011

    प्रिय अशोक भाई बहुत सुन्दर कहा है आप ने …..आपने सावधानियों पर भी लिखा है जरुरत है बोलने की हम गुमसुम देखते रहेंगे तो फिर मुश्किल हो जायेगी… सच में ऐसे ही चूक हो जाती है जब किसी की बातों में दखल अंदाजी नहीं करते और एक बार हमें भी ऐसा लग जाता है की सब जागरूक हैं तो कोई असावधानी नहीं बरतेंगे … बहुत बहुत आभार आप का होश दिलाने के लिए …वैसे अक्सर हम सलाह देते रहते हैं यहाँ वहां .. जय श्री महाकाल भ्रमर ५

vinitashukla के द्वारा
November 22, 2011

सुरक्षा के लिए सचेत करता हुआ उपयोगी लेख. दैव -कृपा से आप एक बड़ी दुर्घटना से बच गए. शुभकामनायें .

    surendr shukl bhramar5 के द्वारा
    November 22, 2011

    आदरणीया विनीता जी अभिवादन और आभार आप का -देव कृपा और आप सब की शुभ कामनाये सदा ही रंग लाती है …आइये हम सब ऐसे ही एक दूसरे के लिए समाज के लिए देश के लिए अपनी उम्र और बढाते चलें …. सब शुभ हो ..सुरक्षा बहुत जरुरी है भ्रमर ५

shashibhushan1959 के द्वारा
November 22, 2011

आदरणीय भ्रमर जी, सादर. हरे वृक्ष का काटा जाना किसी वृद्ध पुरुष को अपने घर से निकाले जाने जैसा ही है. घर के पास के वृक्ष इतने लम्बे समय तक हमारे साथ होते हैं, कि उनसे एक आत्मीय सम्बन्ध जैसा महसूस होने लगता है. कैसे लोग इतने कठोर हो जाते हैं कि बिना किसी उचित कारण के उस लहलहाते हरे भरे वृक्ष की जीवन लीला समाप्त कर देते हैं. एक बार भी ये विचार नहीं करते कि वह उनके सुख-दुःख का साक्षी है.

    surendr shukl bhramar5 के द्वारा
    November 22, 2011

    प्रिय शशिभूषण जी बहुत बहुत आभार आप का सुन्दर विचार ये वृक्ष आत्मीय तो बहुत हो जाते हैं सुख दुःख के साथी भी ..लेकिन इसका एक दूसरा पक्ष भी है जिसे बचाया भी जाना चाहिए घर के पास कृपया इतना बड़ा पेड़ न लगाएं जहां से वह भवन पर गिर सके आंधियां आती हैं बच्चे जानवर लोग सब वहीं रहते हैं कई बार ये हादसे हो चुके हैं आइये इसे भी बचाएं …. धन्यवाद भ्रमर ५

Ramesh Bajpai के द्वारा
November 22, 2011

प्रिय श्री शुक्ल जी हरे दरख्त को काटना हर दृष्टि से अक्षम्य है | फिर इतनी असावधानी | नेकियो ने आपको सलामत रखा | हम सब की दुवाये सदा आपके साथ | शुभ कामनाओ सहित |

    surendr shukl bhramar5 के द्वारा
    November 22, 2011

    प्रिय बाजपेयी जी आप सब से भले इंसान का साथ यों ही तो काम आता है अपने कुछ भी अच्छे साथ व् कर्म यों ही बचाते है प्रभु आप सब को सदा खुश रखे स्वस्थ रखे इस समाज को आप सब का साथ बहुत जरुरी है दीर्घायु हों भ्रमर ५

jlsingh के द्वारा
November 22, 2011

भ्रमर जी, आप तो जोखिम उठाकर पत्रकारिता जैसे आँखों देखा हाल बयां कर रहे थे और तस्वीर भी उतार रहे थे…. एक मीटर मोटा और पचास फुट ऊंचा पेड़ काटने में लोगों ने जरा सावधानी न बरती. और पेड़ काटे ही क्यों गए? ….. निश्चय ही यह हड़बड़ी में भयंकर गड़बड़ी थी. बड़ा हादसा टल गया…. आपके पुन्य कर्म शनिदेव को याद आ गए हों शायद!….

    surendr shukl bhramar5 के द्वारा
    November 22, 2011

    प्रिय जवाहर जी जय शनिदेव सब पर इनकी कृपा बनी रहे सब कुछ पुन्य कर्म करें और उनका लाभ यों ही मिले …जिसके पिता जी का स्वर्गवास हुआ तेरहवीं आदि के लिए लकड़ियों की जरुरत के कारण मजबूरी में काटा गया … पेड़ कटने गिरने के बाद पत्रकारिता शुरू हुयी पहले नहीं …जरा सी असावधानी उस दिन बड़ी घातक हो जाती ..आप सब की दुवाएं काम आयीं आभार भ्रमर ५

sumandubey के द्वारा
November 21, 2011

भ्रमर जी नमस्कार, आप पर देवी दया करे हमारी शुभ कामना आपको व परिवार को भी।

    surendr shukl bhramar5 के द्वारा
    November 22, 2011

    प्रिय सुमन दूबे जी धन्यवाद आप का तथा बहुत बहुत शुभ कामनाएं माँ भवानी की कृपा आप सब पर बरसती रहे …आइये जब तक यहाँ विचरे कुछ अच्छा भला करते रहें आभार भ्रमर ५

Santosh Kumar के द्वारा
November 21, 2011

आदरणीय भ्रमर जी ,.सादर प्रणाम आप बिलकुल सुरक्षित हैं इसी में संतोष है ,..ईश्वर की कृपा सदैव आपके साथ बनी रहे ..यही प्रार्थना है .. पेड़ों को काटना ही गलत है ,..यदि अपरिहार्य हो तो सावधानी बहुत जरूरी है ,….आपके साथ घटी वास्तविक घटना को सचित्र बताने लिए हार्दिक आभार और ढेरों शुभकामनाये

    surendr shukl bhramar5 के द्वारा
    November 22, 2011

    प्रिय संतोष भाई …प्रभु आप सब को सदा खुशहाल रखें ..ताकि आप लोग इस समाज में अच्छाइयों का बीज बोते रहें और दीर्घायु रहें आप सब की दुवाएं हम सब को भी काम आती रहें ….क्योंकि हम भी तो स्वार्थ से भरे पुतले जो ठहरे –पेड़ काटना ही पड़े तो सावधानी से सुन्दर कहा आप ने आभार आप का भ्रमर ५

Rajkamal Sharma के द्वारा
November 21, 2011

आदरणीय भ्रमर जी …. बारम्बार प्रणाम ! भगवान का शुक्र है की आप सकुशल है और आपका मकान भी क्षतिग्रस्त होने से बाल बाल बच गया …… मेरे को दिए गए आपके कमेन्ट आपके काम आ गए …… वैसे अब तो आप अगर न भी दे तो भी बचे ही रहेंगे सपरिवार …… क्योंकि “राजकमल है पूजा जाता” के बाद इस लेख में भी मेरे नाम का उल्लेख कर आपने बहुत ही बड़ा नेकी कमाने वाला पुण्य का कर्म किया है …… हा हा हा हा हा हा आपकी सकुशलता की कामना के साथ आभार सहित आपको मुबारकबाद

    surendra shukla bhramar5 के द्वारा
    November 21, 2011

    प्रिय राज भ्राता श्री –जय श्री राधे ..दिया हुआ बेकार नहीं जाता काम तो आता ही है सच में उस समय हम आप के ब्लॉग पर ही मस्त थे ..आप की शुभ कामनाएं हैं तो अभी बढ़ते रहेंगे आगे पथरीली राहों पर और कुछ दिन …. जैसे आप ने अमित जी के जैकपॉट के बारे में -उनका मन पढ़ा था मनः स्थिति भाँपी थी की लोगों के जज्बात ..उनके मन पर कैसे असर करते हैं आप की बारीकियों के हम कायल हो गए माइक्रोस्कोप सा दिमाग आपका … आज भी वही दिखाई दिया प्रतिक्रियाएं इस शनि ग्रह पर तो बहुत आयीं लेकिन जो मैंने माँगा था शुभ कामना या मुख्य मुद्दा क्या था किसी ने नहीं देखा शायद ….धन्य हैं आप खुदा सदा आप पर मेहरबान रहेंगे .. दारोगा जी सदा मस्त रहिये …. जय श्री राधे भ्रमर ५

vasudev tripathi के द्वारा
November 21, 2011

आदरणीय भ्रमर जी, कारण चाहे शनि देव रहे हों या ग्रामदेव किन्तु एक बड़ा हादसा होने से बच गया यह बड़ा सौभाग्य है| हरे वृक्षों का काटा जाना बहुत निराशाजनक है, काटा गया वृक्ष भले ही बड़े हादसे को टाल दे किन्तु प्रतिकृया में प्रकृति गंभीर प्रतिउत्तर देती ही है यह हमें समझने की आवश्यकता है……

    surendra shukla bhramar5 के द्वारा
    November 21, 2011

    प्रिय वासुदेव जी बिलकुल सच वक्तव्य आप का हादसा टला …हरे वृक्ष का इस तरह काटना निराशाजनक है और प्रकृति कभी न कभी बदले के लिए उद्यत हो ही जाती है …बच्चों का स्कूल बंद था बहुत बड़ा हादसा बचा .. आभार भ्रमर ५

alkargupta1 के द्वारा
November 21, 2011

शुक्ला जी , बहुत ही उपयोगी व महत्त्वपूर्ण सचित्र आलेख ….किसी भी हरे पेड़ को काटना ही सबसे दर्दनाक कार्य है ………पेड़ों को काटने के लिए सावधानी की बहुत आवश्यकता hoti है…..

    surendra shukla bhramar5 के द्वारा
    November 21, 2011

    आदरणीया अलका जी प्रोत्साहन और समर्थन के लिए आभार सच कहा आप ने दर्दनाक तो है ही पेड़ों का काटना और उस पर असावधानी रही तो सत्यानाश … भ्रमर ५

minujha के द्वारा
November 21, 2011

भ्रमर जी नमस्कार अव्वल तो पेङ कटना ही नही चाहिए था, और अगर कट ही गया तो सावधानी  बरतनी चाहिए थी अच्छा आलेख

    surendra shukla bhramar5 के द्वारा
    November 21, 2011

    प्रिय मीनू जी अभिवादन ..बिलकुल पते की बात की आप ने पेड़ काटना ही नहीं चाहिए था ….लेकिन गरीब लोग जाने वाले तो चले गए अब सब को तेरहवीं में खिलाना बुलाना लकड़ी के सहारे ही खाना पकाना बहुत कुछ देखना सुनना मजबूरी भी …सावधानी बरतनी बहुत जरुरी है .. आभार भ्रमर ५

manoranjanthakur के द्वारा
November 21, 2011

चित्रांकन व ज्ञान का बेहतरीन समावेश बधाई

    surendra shukla bhramar5 के द्वारा
    November 21, 2011

    प्रिय मनोरंजन जी अभिवादन लेख पसंद आया लिखना सार्थक रहा -आइये सब मिल पेड़ कटते समय सावधान रहें भ्रमर ५

nishamittal के द्वारा
November 21, 2011

उत्तम व उपयोगी जानकारी प्रदान करने के लिए धन्यवाद.शुक्ल जी.

    surendra shukla bhramar5 के द्वारा
    November 21, 2011

    आदरणीया निशा जी अभिवादन सच में ऐसी बहुत सी घटनाएँ हो चुकी हैं जान लेवा इस में तो एक आदमी थोडा चोट खाया बस ..सो सावधानी बरतनी है … आभार आप का भ्रमर ५


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