Bhramar ka 'Dard' aur 'Darpan'

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तुलसी गीता रंक वास में

Posted On: 1 Mar, 2012 Others में

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तुलसी गीता रंक वास में
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images
(फोटो साभार गूगल/नेट से लिया गया )

अरे विधाता क्यों कठोर तू
पत्थर मूरति मंदिर बैठा
देख देख हालत दुनिया की
क्यों ना दिल है तेरा फटता
कुछ तो दया दिखाओ
अब आओ अब आओ ..
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प्रेम की अलख जगा दे जोगी
सब होते-सब आज हैं रोगी
सडा गला मन लेकर घूमें
बाज गिद्ध सब -हंस न दिखते
दुनिया ज़रा बचाओ
अब आओ अब आओ .
———————————–
बड़े महल हैं सजे सजाये
मन मिलता -ना -नैन मिलाये
तुलसी गीता “रंक” वास में
पावन गंगा -जल डाले तुम
जीवन सरल बनाओ
अब आओ अब आओ .
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प्यारे बच्चे घूम रहे हैं
भूखे नंगे रोते सोते
कहीं बाँझ गोदी है सूनी
विपदा सब हर जाओ
अब आओ अब आओ .
——————————-
नयन विहीन -चक्षु दे जाओ
बेसुर को सुर ताल सिखाओ
उस गरीब को हक दिलवाओ
पत्थर दिल पिघलाओ
अब आओ अब आओ .
——————————-
नैनो में तुम ज्योति जगा दो
मन खुश्बू भर जाओ
शान्ति ख़ुशी – सुख भरा हो आंगन
राम-राज्य फिर लाओ
अब आओ अब आओ .
——————————-
भरो ताजगी जोश होश सब
सूरज चंदा बन चमकें
धरती गगन सा हो विस्तृत मन
पुलकित रोम-रोम मन महके
मुक्त फिरें हम संग-संग गाते
सब को गले लगाओ
अब आओ अब आओ …..
———————————
हरी भरी बगिया हो सब की
बुलबुल कोयल चहकें
मन-मयूर हों नर्तन करते
चंदन -पुष्प-सरीखे महकें
तितली सा- शिशु मन -उड़-उड़
इन्द्रधनुष हो जाए
अब आओ… अब आओ …..
————————————-
सुरेन्द्र कुमार शुक्ल “भ्रमर५”
७.२१-७.४५ पूर्वाह्न
करतारपुर जल पी बी २४.०२.12

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34 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

dineshaastik के द्वारा
March 5, 2012

मेमोरी कमजोर खुदा की, या फिर नहीं सुनाई देता। अन्धा भी है इसीलिये क्या, कुछ न उसे दिखाई देता। जब जब धर्म की होगी हानि, तब तब आऊँगा धरती पर। अभी अति न हो पाई है,  आना है मेरी मर्जी पर। कहता पाप करो कुछ ज्यादा, यदि चाहते मुझे बुलाना। उनको शायद यह लगता है ठीक ठाक है अभी जमाना। होली के रंगीन पर्व पर आपको सपरिवार इन्द्रधनुषी शुभकामनायें। ttp://dineshaastik.jagranjunction.com/2012/03/04/%क्या सचमुच ईश्वर है (कुछ सवाल)

ANAND PRAVIN के द्वारा
March 4, 2012

आदरणीय भ्रमर सर, सादर प्रणाम आपकी इस करूँ आवाहन को सुन………. भगवान् का दिल अवश्य पिघलेगा और उन्हें आना ही होगा आपको आपकी इस गाथा की हार्दिक बधाई होली मुबारक ………..

    March 5, 2012

    सादर नमस्कार! भरो ताजगी जोश होश सब सूरज चंदा बन चमकें धरती गगन सा हो विस्तृत मन पुलकित रोम-रोम मन महके मुक्त फिरें हम संग-संग गाते सब को गले लगाओ अब आओ अब आओ …….आमीन! जितना सुन्दर भाव, उतनी ही सुन्दर अभिव्यक्ति……

shashibhushan1959 के द्वारा
March 4, 2012

आदरणीय भ्रमर जी, सादर ! बहुत सुन्दर एवं सार्थक आह्वान ! ह्रदय से निकली हुई पुकार !

Santosh Kumar के द्वारा
March 2, 2012

आदरणीय भ्रमर जी ,.सादर प्रणाम भगवान हमारी पुकार अवश्य सुनेंगे !…बहुत ही कारुणिक आवाहन ,..ह्रदय से आभार आपका

    surendra shukla bhramar5 के द्वारा
    March 2, 2012

    प्रिय संतोष जी आभार आप का प्रोत्साहन हेतु काश प्रभु भक्तों का दर्द समझें और अन्यायिओं का मन बदलें …रचना आप को भायी सुन ख़ुशी हुयी भगवान हमारी पुकार अवश्य सुनेंगे………जय श्री राधे भ्रमर ५

akraktale के द्वारा
March 2, 2012

आदरणीय भ्रमरजी नमस्कार, भरो ताजगी जोश होश सब सूरज चंदा बन चमकें धरती गगन सा हो विस्तृत मन पुलकित रोम-रोम मन महके मुक्त फिरें हम संग-संग गाते सब को गले लगाओ अब आओ अब आओ ….. बहुत सुन्दर आव्हाहन. कुछ कारण तो आपने लिख दिए अभी कई बाकी हैं इसलिए मै भी आपके सुर में सुर मिला कर यही कहता हूँ अब आओ अब आओ….

    surendr shukl bhramar5 के द्वारा
    March 2, 2012

    प्रिय अशोक जी जरुर…. हमें इन्तजार रहेगा और और कारण सुनने के लिए वैसे कारण का पता कर के निवारण खोजा जाए प्रभु साथ दें तो आनंद और आये … आभार आप का भ्रमर ५

March 2, 2012

भ्रमर जी नमस्कार ! सुंदर भाव लिए हुए ईश का आहवान ! हरी भरी बगिया हो सब की बुलबुल कोयल चहकें मन-मयूर हों नर्तन करते चंदन -पुष्प-सरीखे महकें तितली सा- शिशु मन -उड़-उड़ इन्द्रधनुष हो जाए अब आओ… अब आओ ….. सुंदर मनभावन रचना के लिए आपको बहुत बहुत बधाई !!

    surendr shukl bhramar5 के द्वारा
    March 2, 2012

    प्रिय सूरज जी ये प्रभु से प्रार्थना आप के मन को भायी सुन ख़ुशी हुयी प्रभु सब मंगलमय करें आइये गुहार लगाते रहें आभार भ्रमर ५

jlsingh के द्वारा
March 1, 2012

आदरणीय भ्रमर जी, सादर अभिवादन! ईश्वर आपकी और हम सबकी समवेत पुकार अवश्य सुनेंगे और हरी भरी बगिया हो सब की बुलबुल कोयल चहकें मन-मयूर हों नर्तन करते चंदन -पुष्प-सरीखे महकें तितली सा- शिशु मन -उड़-उड़ इन्द्रधनुष हो जाए अब आओ… अब आओ …..

    surendr shukl bhramar5 के द्वारा
    March 2, 2012

    प्रभु जी अवश्य ये हम सब की पुकार सुनेंगे कुछ बदलाव तो होगा ही आइये चातक सा उनको ताकते कुछ नाम जपते चलें जय श्री राधे जवाहर जी भ्रमर ५

chaatak के द्वारा
March 1, 2012

वंदना के इन स्वरों में एक स्वर मेरा मिला लो! खूबसूरत रचना पर हार्दिक बधाई!

    surendr shukl bhramar5 के द्वारा
    March 2, 2012

    चातक जी बहुत सुन्दर काश सब आराधना में संग संग हों ऐसे ही स्वर मिला लें ..तो आनंद और आये जय श्री राधे भ्रमर ५

sadhana thakur के द्वारा
March 1, 2012

भ्रमर भाई ,हमेशा की तरह बहुत अच्छी ,सन्देश देती कविता ,आजकल आपके विचार नहीं मिल रहे हैं …………

    surendr shukl bhramar5 के द्वारा
    March 1, 2012

    हाँ साधना जी कुछ व्यस्तता और नेट की समस्या से बस काम चला पा रहा हूँ …जरुर दर्शन करेंगे ….जय श्री राधे रचना से अच्छा सन्देश गया आप का समर्थन मिला सुन ख़ुशी हुयी आभार भ्रमर ५

RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
March 1, 2012

बहुत सुन्दर रचना,आदरणीय भ्रमर जी. भरो ताजगी जोश होश सब सूरज चंदा बन चमकें धरती गगन सा हो विस्तृत मन पुलकित रोम-रोम मन महके मुक्त फिरें हम संग-संग गाते सब को गले लगाओ बहुत सुन्दर पंक्तियाँ हैं.

    surendr shukl bhramar5 के द्वारा
    March 1, 2012

    प्रिय राजीव जी अभिवादन रचना की ये पंक्तियाँ आप के मन को छू पायीं ख़ुशी हुयी आइये प्रभु से प्रार्थना कर बुलाते रहे टेर लगाएं …जय श्री राधे आभार भ्रमर ५

mparveen के द्वारा
March 1, 2012

हरी भरी बगिया हो सब की बुलबुल कोयल चहकें मन-मयूर हों नर्तन करते चंदन -पुष्प-सरीखे महकें तितली सा- शिशु मन -उड़-उड़ इन्द्रधनुष हो जाए अब आओ… अब आओ ….. हम सब भी यही चाहते हैं की इश्वर अवतरित हों और सबकी अभिलाषाएं पूरी हो सबको सन्मति दें और सब पर अपना आशीर्वाद बनाये रखें … धन्यवाद…

    surendr shukl bhramar5 के द्वारा
    March 1, 2012

    हाँ परवीन जी प्रभु ही पतवार बन भव सागर पार करा सकते हैं ये नेता मंत्री गुंडा राज बढ़ते जा रहा है काश आप की बात प्रभु सुन लें जय श्री राधे भ्रमर ५

Tamanna के द्वारा
March 1, 2012

शुक्ल जी.. अब तो भगवान ही आकर बढ़ती परेशानियों को सुलझा सकते हैं… हमारे राजनेताओं के तथाकथित प्रभावी प्रयास तो बेकार और असफल हो चुके हैं.

    surendr shukl bhramar5 के द्वारा
    March 1, 2012

    हाँ तमन्ना जी सच कहा आप ने लेकिन प्रभु न जाने कहाँ मग्न हैं या योगनिद्रा में रमे हैं आइये याद करते रहें आभार जय श्री राधे भ्रमर ५

Sumit के द्वारा
March 1, 2012

भगवान् को धरती पे बुलाने का सुंदर प्रयास ,,,साथ में समाज का चित्रण …अति सुंदर http://sumitnaithani23.jagranjunction.com/2012/02/18/हिंदुस्तान-vs-इंडिया/

    surendr shukl bhramar5 के द्वारा
    March 1, 2012

    प्रिय सुमित जी जय श्री राधे हाँ प्रभु को आइये जल्द बुलाएं ये कलयुग तो ना जाने कब तक रहेगा अन्याय बढ़ रहा है आभार भ्रमर ५

yogi sarswat के द्वारा
March 1, 2012

भ्रमर साब ! राधे राधे ! परम पिता परमेश्वर “अब आओ… अब आओ ….” की गर्ज़ना सुनकर अवश्य सोच रहे होंगे की जो व्यक्ति इतना बढ़िया लेखन करता है उसकी विनय मुझे मान ही लेनी चाहिए ! बहुत सुन्दर शब्द , बहुत सुन्दर प्रस्तुति ! .

    surendr shukl bhramar5 के द्वारा
    March 1, 2012

    प्रिय योगी जी प्रभु तो योगी की पहले सुनते हैं आइये आप भी इस गुहार में शामिल हों जय श्री राधे रचना आप को सुन्दर लगी ख़ुशी हुयी भ्रमर ५

nishamittal के द्वारा
March 1, 2012

बहुत सुन्दर शब्दों में प्रभु से गुहार .सार्थक रचना.

    surendr shukl bhramar5 के द्वारा
    March 1, 2012

    निशा जी अभिवादन ये प्रभु से गुहार आज की जरुरत दिख रही है काश प्रभु सुनें जय श्री राधे भ्रमर ५

alkargupta1 के द्वारा
March 1, 2012

शुक्ला जी , सार्थक आह्वाहन ….. हरी भरी बगिया हो सबकी बुलबुल कोयल चहकें मन मयूर हों नर्तन करते चन्दन पुष्प सरीखे महकें तितली- शिशु मन उड़-उड़ इंद्र धनुष हो जावे अब आओ …..अब आओ…. बहुत सुन्दर पंक्तियाँ ………हम सब विधाता से प्रार्थना ही कर सकते हैं…… ईश्वर शीघ्र ही अभिलाषा पूर्ण करे और वातावरण स्वर्गमय हो जाये ……… उत्कृष्ट कृति

    surendr shukl bhramar5 के द्वारा
    March 1, 2012

    आदरणीया अलका जी राधे राधे बहुत सुन्दर आवाहन और मन आप का …काश लोग ऐसा ही सोचें और करें तो निश्चित ही हम कुछ पा जाएँ …हम सब विधाता से प्रार्थना ही कर सकते हैं…… ईश्वर शीघ्र ही अभिलाषा पूर्ण करे और वातावरण स्वर्गमय…आइये ये प्रार्थना करते रहें बढ़ते रहें जय हिंद भ्रमर ५

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
March 1, 2012

भरो ताजगी जोश होश सब सूरज चंदा बन चमकें धरती गगन सा हो विस्तृत मन पुलकित रोम-रोम मन महके मुक्त फिरें हम संग-संग गाते सब को गले लगाओ अब आओ अब आओ ….. बिछड़े साथी सब रंग मंच के आवाहन कर भ्रमर जी बुलाओ सूना उपवन कातर मन शमशान हुआ बैरागी मन कंठ अवरुद्ध , माला टूटी जे जे मंच की गयीं विभूति कैसी संस्कारों की ये रीती फैला तम दुखी मेरा मन जे जे पर फिर दिया जलाओ सुन्दर भाव, सुन्दर प्रस्तुति.

    surendr shukl bhramar5 के द्वारा
    March 1, 2012

    आदरणीय कुशवाहा जी बहुत सुन्दर रचना… कृति आप की खूबसूरत …फैला तम दुखी मेरा मन जे जे पर फिर दिया जलाओ….दिया जलाओ..दिया जलाओ.. सुन्दर आवाहन ..अपना स्नेह बनाए रखें …. जय श्री राधे भ्रमर ५

    jlsingh के द्वारा
    March 1, 2012

    आदरणीय श्री कुशवाहा जी और भ्रमर जी, सादर अभिवादन! आप दोनों का युगल प्रयास से मोती की लड़ियाँ शायद पुन: जुड़ जाय! एक दीपक ले के आयें, मुस्काएं हर बोली में, मिलें गले फिर मंच पुकारे, देर नहीं अब होली में ईश्वर अब आओ, गले मिलाओ, अब आओ अब आओ!

    surendra shukla bhramar5 के द्वारा
    March 2, 2012

    एक दीपक ले के आयें, मुस्काएं हर बोली में, मिलें गले फिर मंच पुकारे, देर नहीं अब होली में ईश्वर अब आओ, गले मिलाओ, अब आओ अब आओ!… प्रिय जवाहर जी सुन्दर ..आइये कोशिश करते रहें ..बूढ़े बाबा होली गायें रंग उड़ायें भीड़ जमायें सब के दिल में घुस जाएँ ह हा …अब तो आप सब को चिढाने वाली रचनाएँ लिखनी होंगी जय श्री राधे भ्रमर ५


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