Bhramar ka 'Dard' aur 'Darpan'

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मृगनयनी कैसी तू नारी ??

Posted On: 5 Jul, 2012 Others में

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मृगनयनी कैसी तू नारी ??
——————————

मृगनयनी कजरारे नैना मोरनी जैसी चाल
पुन्केशर से जुल्फ तुम्हारे तू पराग की खान
तितली सी इतराती फिरती सब को नाच नचाती
तू पतंग सी उड़े आसमाँ लहर लहर बल खाती
कभी पास में कभी दूर हो मन को है तरसाती
इसे जिताती उसे हराती जिन्हें ‘काट’ ना आती
कभी उलझ जाती हो ‘दो’ से महिमा तेरी न्यारी
पल छिन हंसती लहराती औंधे-मुंह गिर जाती
कटी पड़ी भी जंग कराती – दांव लगाती
‘समरथ’ के हाथों में पड़ के लुटती हंसती जाती
तो जीती तो भी जीती – हारे ‘हार’ है पाती
कभी सरल है कभी कठिन तू अजब पहेली ‘भाती’
कोमल गात कभी किसलय सी छुई -मुई है लगती
कभी शेरनी कभी सर्पिणी कभी दामिनी लगती
गोरी कलाई हरी चूड़ियाँ इंद्र-धनुष सी दिखती
रौद्र रूप धारण करती तो बनी कालिका फिरती
ज्योति पुंज है तू लक्ष्मी है सब के दिल की जान है तू
कभी मेनका कभी अप्सरा ऋषि मुनि का अभिशाप है तू
तो वीणा है सुर-लहरी तू मन का रस ‘आलाप’ है तू
तू माया है बड़ी मोहिनी एक भंवर जंजाल है तू
तू नैया है कभी खिवैया पार करे पतवार है तू
तू उलझन है कर्कश लहरें प्रलय बड़ी तूफ़ान है तू
तू गुलाब है बेला जूही रात की रानी कली चमेली
नागफनी है काँटा है तू बेल है तू विष-कन्या सी
पावन है तू गीता है तू सीता सावित्री गंगा धारा
काम-सूत्र है तू मदांध है बड़ी स्वार्थी विष की धारा
मधुर चांदनी मधु-मास है तू वसंत है प्रेम की खान
कृष्ण पक्ष है बड़ी मंथरा बनी पूतना होती ‘काल’
तू चरित्र है या कलंक है प्रेम विरह में ‘भ्रमर’ घूमते चक्कर खाते
अगणित अद्भुत रूप तुम्हारे जान बूझ भी ‘पर’ कटवाते
अमृत-कुण्ड नहा लेते कुछ मैली-सरिता -’सभी’ डुबाते
कीट-पतंगों सा जल-जल भी मरते दम तक कुछ मंडराते
ये प्रेम बड़ी है अद्भुत माया जो पाया वो सभी लुटाया
नींद गंवाता चैन गंवाता सब कुछ हारे सब कुछ पाता
इस जीवन सी गजब पहेली संग संग विचरे बनी सहेली
आओ जी भर प्यार करें हम डूब के पा लें सारे मोती
बड़ी सुनहरी सपना है तू सीपी है तू सात जनम की साथी
चकाचौंध है तू मेला है पल छिन की बाराती
सुन्दर कानन कल्प वृक्ष तू जीवन दाई हरियाली
तू उचाट है वंजर है तू कभी उगा- खा जाती
प्रेम ग्रन्थ आओ पढ़ पढ़ के कुछ गुत्थी सुलझाएं
मरें मिटें दीवाने चाहे प्रेम ‘अमर’ हो जाए
————————————————————-
सुरेन्द्र कुमार शुक्ल ‘भ्रमर’५
१.३०-२.२० मध्याह्न
फतेहपुर – कुल्लू हिमाचल रास्ते में वाहन में
२८.०२.२०१२



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45 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

roshni के द्वारा
July 13, 2012

वाह शुक्ल जी बहुत सुंदर कविता .. इस जीवन सी गजब पहेली संग संग विचरे बनी सहेली आओ जी भर प्यार करें हम डूब के पा लें सारे मोती बड़ी सुनहरी सपना है तू सीपी है तू सात जनम की साथी चकाचौंध है तू मेला है पल छिन की बाराती.. हर पंक्ति सुंदर आभार

    surendra shukla bhramar5 के द्वारा
    July 16, 2012

    आदरणीया रौशनी जी आप ने वाह कहा नारियों के बिभिन्न रूपों को दर्शाती इस रचना को सराहा मन हर्षित हुआ ..आभार भ्रमर ५

yogi sarswat के द्वारा
July 13, 2012

बड़ी सुनहरी सपना है तू सीपी है तू सात जनम की साथी चकाचौंध है तू मेला है पल छिन की बाराती सुन्दर कानन कल्प वृक्ष तू जीवन दाई हरियाली तू उचाट है वंजर है तू कभी उगा- खा जाती प्रेम ग्रन्थ आओ पढ़ पढ़ के कुछ गुत्थी सुलझाएं मरें मिटें दीवाने चाहे प्रेम ‘अमर’ हो जाए क्या बात है श्री भ्रमर साब ! बहुत सुन्दर !

    surendra shukla bhramar5 के द्वारा
    July 16, 2012

    प्रिय योगी जी नारियों के बिभिन्न रूपों वाली ये रचना आप को सुन्दर लगी लिखना सार्थक रहा .. आभार भ्रमर ५

seemakanwal के द्वारा
July 12, 2012

नारी के विभिन्न रूपों का बहुत सुन्दर चित्रण किया है .

    surendra shukla bhramar5 के द्वारा
    July 16, 2012

    आदरणीया सीमा कंवल जी अभिवादन आप का ..नारी के बिभिन्न रूप दर्शाती ये रचना आप को आकर्षित कर पायी सुन हर्ष हुआ आभार भ्रमर ५

minujha के द्वारा
July 11, 2012

वाह भ्रमर जी वाह आपकी इस रचना ने मुख को विवश कर दिया -वाह कहने के लिए…..आगे  क्या कहुं , बहुत सुंदर

    surendra shukla bhramar5 के द्वारा
    July 11, 2012

    प्रिय मीनू जी आप की सराहना सर आँखों पर ..रचना सुन्दरता से नारी के बिभिन्न रूपों को दर्शा पायी सुन बहुत खुश हुयी आभार भ्रमर ५

pritish1 के द्वारा
July 8, 2012

भ्रमर जी आपसे एक प्रश्न है……….उत्तर अवश्य दीजिये…….! क्यों बनाया हमने ऐसा समाज…….? http://pritish1.jagranjunction.com/2012/07/07/kyun-banaya-hamne-aisa-samaj/

    surendr shukl bhramar5 के द्वारा
    July 9, 2012

    प्रिय प्रीतिश जी आभार आप पधारे प्रश्न के साथ ..अब पढेंगे तब कुछ जरुर कहेंगे .. क्यों बनाया हमने ऐसा समाज…….? हमने में आप भी शामिल हैं इस लिए फिलहाल तो अपने हाले दिल से पूछिए जनाब … जय श्री राधे भ्रमर 5

Rajkamal Sharma के द्वारा
July 8, 2012

राजकमल उर्फ कसाई जी , आपका आभार प्रकट करने के लिए मेरे पास फंड की बेहद कमी हो गई है जल्द ही लोन के लिए अप्लाई करके + अरेंज करके आपका कर्ज चुकता करने की पुरजोर कोशिश करता हूँ – सुरेन्द्र कुमार “भ्रमर” :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| (तू चरित्र है या कलंक है प्रेम विरह में ‘भ्रमर’ घूमते चक्कर वोह कौन सा रूप और गुण है नारी का जिसका की आपने वर्णन नहीं है किया सिवाय त्रिया चरित्र के अब तो घर की चार दीवारी से बाहर निकलती जा रही रही नारी हर तरफ बहार बन के छाती जा रही है और सभी को अपने पीछे घुमाती चली जा रही है – अति सुन्दर रसमयी रचना आनंदित करती हुई * ) जय बोलो भगवान शंकर महादेव महाराज जी की सदाशिव जी की

    surendr shukl bhramar5 के द्वारा
    July 9, 2012

    प्रिय राज भ्राता श्री कांग्रेसी भैया ….हम को तो आप ने राजकमल उर्फ कसाई जी , आपका आभार प्रकट करने के लिए मेरे पास फंड की बेहद कमी हो गई है मेरे नाम के साथ ये प्रतिक्रिया दिखा के डरा ही दिया …सोचा फिर गफलत शुरू क्या ? फिर आप की स्टाईल याद आई आभार …बहुत ख़ुशी आप बहारों में खोये गुम हुए मस्त व्यस्त विचरण कर रहे हैं और भरमार को फूलों कलियों भरे नदी तीरे पहाड़ों में …… जय बोलो भगवान शंकर महादेव महाराज जी की सदाशिव जी की भ्रमर ५

akraktale के द्वारा
July 7, 2012

आदरणीय सुरेन्द्र जी नमस्कार, चकाचौंध है तू मेला है पल छिन की बाराती सुन्दर कानन कल्प वृक्ष तू जीवन दाई हरियाली तू उचाट है वंजर है तू कभी उगा- खा जाती प्रेम ग्रन्थ आओ पढ़ पढ़ के कुछ गुत्थी सुलझाएं मरें मिटें दीवाने चाहे प्रेम ‘अमर’ हो जाए वाह क्या बात है पहाड़ों पर विचरण और नारी चित्रण बहुत बढ़िया. बधाई.

    surendr shukl bhramar5 के द्वारा
    July 9, 2012

    प्रिय अशोक भाई जय श्री राधे बिना विचरण किये कहाँ काम चलता है जनाब साधू सन्यासी पापी पेट का सवाल है ह ..हा हम लोग नेता के पीछे घूम घूम जय श्री राधे तो कर नहीं सकते … नारी चित्रण आप को अच्छा लगा सुन ख़ुशी हुयी भ्रमर ५

yamunapathak के द्वारा
July 7, 2012

ek संज्ञा,विशेषण इतने.बहुत खूब वर्णन है . सच तो यह है की इन हर रूप में होने की प्रेरणा उसे किसी ना किसी शिव से ही मिलती है. बहुत सुन्दर रचना है शब्दों का गठन अत्यंत खुबसूरत है.

    surendra shukla bhramar5 के द्वारा
    July 7, 2012

    यमुना जी …सच तो यह है की इन हर रूप में होने की प्रेरणा उसे किसी ना किसी शिव से ही मिलती है…इसे थोडा और स्पष्ट करतीं तो आनंद और आता वैसे हर कुछ के पीछे कारक हो होता ही है ..नारी के बिभिन्न रूपों के पीछे …शिव या और कोई …पुरुष कोई भी ….पर नारी सम्मान की पात्र है सदा रचना में शब्द विन्यास आप को अच्छे लगे सुन ख़ुशी हुयी आभार भ्रमर ५

आर.एन. शाही के द्वारा
July 7, 2012

नारी के असंख्य रूप का बड़ा ही सजीव चित्रण हुआ है भ्रमर जी । इतना बेबाक दर्शन एक भ्रमर की दृष्टि से ही संभव है । बधाई !

    surendra shukla bhramar5 के द्वारा
    July 7, 2012

    आदरणीय शाही जी आप के दर्शन दुर्लभ ही हैं आप आये बड़ी ख़ुशी हुयी नारी के बिभिन्न रूप आप के मन तक जा पहुंचे ..रचना बेबाक दर्शन करा सकी …लिखना सार्थक रहा …भ्रमर का आप को नमन … भ्रमर ५

Alka Gupta के द्वारा
July 7, 2012

शुक्ला जी ,बहुत सुन्दर शब्द विन्यास…कवि की लेखनी को नमन ! नारी के विभिन्न रूपों का दर्शन कराती श्रेष्ठ कृति

    surendra shukla bhramar5 के द्वारा
    July 7, 2012

    हाँ अलका जी कवी की लेखनी को सदा माँ की कृपा बनी रहनी चाहिए और हम उसको नमन करें उत्साह दूना हो और रचा जाए …आभार आपका …. रचना आप की नजर में श्रेष्ठ कृति बनी मन अभिभूत हुआ भ्रमर ५

Punita Jain के द्वारा
July 6, 2012

आदरणीय भ्रमर जी, नारी के सकारात्मक और नकारात्मक दोनों रूपों का बहुत ही सुन्दर, विस्तृत और अदभुत वर्णन आपकी इस रचना में देखने को मिला | ज्योति पुंज है तू लक्ष्मी है सब के दिल की जान है तू कभी मेनका कभी अप्सरा ऋषि मुनि का अभिशाप है तू ———सुन्दर पंक्तियाँ

    surendr shukl bhramar5 के द्वारा
    July 6, 2012

    हाँ पुनीता जी क्षमा चाहूंगा चूंकि दोनों रूपों को दर्शाना था इस में इस लिए नकारात्मक भाव भंगिमा भी शामिल करना पड़ा…जग में दोनों रूप दर्शित होते भी हैं …. वैसे मै सदैव नारियों के धनात्मक रुख का पुजारी रहा हूँ और सम्मान ही नवाजता हूँ बहुत बहुत आभार आप का .. भ्रमर ५

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
July 6, 2012

प्रेम ग्रन्थ आओ पढ़ पढ़ के कुछ गुत्थी सुलझाएं मरें मिटें दीवाने चाहे प्रेम ‘अमर’ हो जाए आदरणीय भ्रमर जी, सादर तारीफ़ करून आपकी या जिसने आपको बनाया भाई जवाहर सिंह जी, भाई शशि भूषण जी तो अन्तर्यामी हैं मेरी मूंछों के निचे तक की स्थिति बयां कर देते हैं. इसे ही सत्य जाने. बधाई

    surendr shukl bhramar5 के द्वारा
    July 6, 2012

    आप बड़े भाग्यशाली हैं कुशवाहा जी जो ऐसे प्रबुद्ध प्रिय लोग आप की मूंछों की इतनी कद्र करते हुए सम्मान से नवाज हंसाते रहते हैं आनंद के सिवा दुनिया में कुछ नहीं ..आप स्वास्थ्य लाभ करें और लैपटाप ले जुट जाएँ जल्दी से ….शुभ कामनाएं … हम गायें की मूंछे हों तो हमारे प्रिय कुशवाहा जी जैसे ….. भ्रमर ५

    shashibhushan1959 के द्वारा
    July 6, 2012

    आदरणीय प्रदीप भैया, सादर ! मुझे इसकी जानकारी नहीं थी ! भगवान् से करवद्ध प्रार्थना है, आप शीघ्र स्वास्थ्य लाभ कर घर पधारें ! ( अब आपकी मूंछों के नीचे की मुस्कान का वास्तविक राज पता चला ! )

    surendra shukla bhramar5 के द्वारा
    July 6, 2012

    प्रिय शशि भाई हमारी भी शुभ कामनाएं आप की प्रार्थना के साथ जोड़ लीजिये दुगुना होने पर और जल्दी और राज पता चलेंगे आइये कुशवाहा जी स्वागत है .. भ्रमर ५

Chandan rai के द्वारा
July 6, 2012

भ्रमर साहब , आपकी इस रचना को पढ़ कोई भी नारी मंत्रमुग्ध हुए बिना नहीं रह सकती , इसे सुन तो स्वर्गलोक की अप्सरा मेनका अपने दुर्भागया का रोना रो रही होगी , और इद्रदेव से गुहार कर आपके पास आने को आतुर हो गई होगी ! बेहतरीन रचना !

    surendr shukl bhramar5 के द्वारा
    July 6, 2012

    चन्दन भाई ये कहाँ मस्त हो गए लगता है इंद्र दरबार में जा पहुंचे अपने यादों के उड़न खटोले में सवार हो के ..प्रभु आप की यात्रा को सफल करे और आनंद बढ़ाये रम्भा मेनका अप्सरा से मिल कुछ यादें संजो लाइयेगा … बहुत चुटीली प्यारी प्रतिक्रिया .. आभार भ्रमर ५

Mohinder Kumar के द्वारा
July 6, 2012

सुरेन्द्र जी, नमस्कार, नारी के अनेकों रूपों का सुन्दर वर्णन किया है आपने.. यह रूप वह समयानुसार धारण करती है. सत्य यह है कि जिसने उसके अन्तर्मन को जान लिया उसने ब्रह्माण्ड को जान लिया. लिखते रहिये

    surendr shukl bhramar5 के द्वारा
    July 6, 2012

    काश हम भी जान पाते मोहिंदर जी तो हिग्स बोसान के पीछे का रहस्य समझ जाते लेकिन कहा गया है न की दैवो न जानाति त्रिया चरित्रं ….कब कौन सा रूप धारण कर लें क्या करा डालें प्रभु ही जानें शायद …. आभार भ्रमर ५

nishamittal के द्वारा
July 6, 2012

बधाई शुक्ल जी

    surendr shukl bhramar5 के द्वारा
    July 6, 2012

    आदरणीया निशा जी सराहना के लिए बहुत बहुत आभार भ्रमर ५

jlsingh के द्वारा
July 6, 2012

आदरणीय भ्रमर जी, नमस्कार ! तू चरित्र है या कलंक है प्रेम विरह में ‘भ्रमर’ घूमते चक्कर खाते अगणित अद्भुत रूप तुम्हारे जान बूझ भी ‘पर’ कटवाते अमृत-कुण्ड नहा लेते कुछ मैली-सरिता -’सभी’ डुबाते कीट-पतंगों सा जल-जल भी मरते दम तक कुछ मंडराते सुरेन्द्र कुमार शुक्ल ‘भ्रमर’५ १.३०-२.२० मध्याह्न फतेहपुर – कुल्लू हिमाचल रास्ते में वाहन में २८.०२.२०१२ जयशंकर प्रसाद ने भी नारी के विविध रूपों का वर्णन किया है … आपने विविध रूपों का दर्शन किया है और आपकी लेखनी या लैपटॉप …. वाहन में भी ब्योम के दर्शन! अगर सरिता में डुबकी लगाई तो क्षीरसागर!.. धन्य हैं महाप्रभु!

    shashibhushan1959 के द्वारा
    July 6, 2012

    आदरणीय जवाहर भाई, “”जयशंकर प्रसाद ने भी नारी के विविध रूपों का —”"वर्णन”"—– किया है … आपने विविध रूपों का —-”"”दर्शन”"”"—— किया है और आपकी लेखनी या लैपटॉप …. वाहन में भी ब्योम के दर्शन! अगर सरिता में –”डुबकी”— लगाई तो क्षीरसागर!.. धन्य हैं महाप्रभु!”" कहाँ हैं प्रदीप बाबा ! मूंछों के नीचे से मुस्का रहे होंगे !

    Santosh Kumar के द्वारा
    July 6, 2012

    आदरणीय सर ,..सादर प्रणाम नारी के सभी रूपों और उनके prabhavon के दर्शन कराती अद्भुत रचना ,…आप रास्ते में भी इतना एकाग्र होकर लिख लेते हैं ,.बहुत बधाई ,..

    PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
    July 6, 2012

    आदरणीय शशि भूषण जी, सादर मैं पि. जी. आई. में अपनी चिकित्सा करा रहा हूँ. लैपटॉप जब्त है.

    surendr shukl bhramar5 के द्वारा
    July 6, 2012

    वाहन में भी ब्योम के दर्शन! अगर सरिता में डुबकी लगाई तो क्षीरसागर!.. धन्य हैं महाप्रभु!..प्रिय जवाहर भाई क्या गूढ़ बाते हैं आप की ह हा तड़का लगा दिया तूने ..गाने को मन करता है हम आभारी हैं इन्टरनेट के की यहीं काव्य गोष्टी हो जाती है बिना किसी पार्क में चादर बिठाये बैठे झुण्ड में ….गोला बनाये इलाहाबाद के चंद्रशेखर पार्क में बैठे कवियों सा …मूछों के नीचे नीचे हंस आनंद भी …. नहीं भाई हस्त लिखित ही यात्रा के दौरान … लैप टाप कम्प्यूटर तो बाद में काम आता है … बस अपने दिल में उठती लहरों को आप सब से बाँट लेता हूं समय बहुत कम है आप का शशि भाई का , प्रदीप जी का बहुत बहुत आभार यों ही रंग चढ़ा रहे …जय हिंद भ्रमर ५

    surendr shukl bhramar5 के द्वारा
    July 6, 2012

    संतोष भाई अभिवादन जब ये भाव छलकने लगते हैं तो रोके कहाँ रुकते हैं बस एक कलम और कागज का टुकड़ा मिल जाए सब मिल गया समझिये आप खुद इतने प्रभावी लेखक हैं कवि मन को समझ सकते हैं .. आभार भ्रमर ५

    surendr shukl bhramar5 के द्वारा
    July 12, 2012

    मैं पि. जी. आई. में अपनी चिकित्सा करा रहा हूँ. लैपटॉप जब्त है… आदरणीय प्रदीप जी उम्मीद है की अब तक आप ने स्वास्थ्य लाभ कर लिया होगा प्रभु से दुआ है की वो आप को शीघ्र स्वस्थ करें अपनी खबर शीघ्र दीजियेगा लैप टाप छुडाइये … भ्रमर ५

shashibhushan1959 के द्वारा
July 5, 2012

आदरणीय भ्रमर जी, सादर ! क्या खूब वर्णन किया है आपने ! मैं तो बस यहीं कहूंगा….. . “”इस माया के रूप हजारों, किसे बताएं, किसे छिपायें ! चितवन से ही घायल करती, चितवन से ही अमिय पिलाये ! सुर-नर-मुनि, आकाश-धरा पर, कोई इसको समझ न पाये ! रूपजाल में सब जीवों को, मृगनयनी रहती उलझाये !!!”" . लेकिन प्रभु एक शंका है….. आपने जो लिखा है- “फतेहपुर – कुल्लू हिमाचल रास्ते में वाहन में” तो यात्रा में वाहन में बैठ कर ………… धन्य – धन्य हैं ! (क्षमाप्रार्थना के साथ) जय हो ! जय हो !

    surendra shukla bhramar5 के द्वारा
    July 5, 2012

    आदरणीय शशि भाई कृपया शंका त्याग दें अब हम और आप सत्य की धरा पर नहीं चलेंगे तो क्या लिखेंगे क्यों लिखें ऐसी बहुत सी रचनाएँ जन्म ले चुकी हैं राह में टेढ़ी मेढ़ी लिखी जिसे मै खुद हिंदी बनाते भी पढ़ नहीं पाता कभी कभी प्रभु ….मेरी आदत रही है जैसे हमारे जन्म के साथ जन्म का समय दिन नाम महत्त्व रखता है वैसी ही रचनाओं का भी बिलकुल सत्य नामकरण और जन्म स्थान समय लिख देता हूं …आशा है आप अब विश्वास करेंगे …प्रबुद्ध रचनाकारों को शिकायत भी रही है की समय देते तो रचनाएँ और रचनात्मक रुख लेती मै समझता भी हूँ कुछ समय की कमी कुछ आदत से मजबूर ,,,,,न जाने कब हमे भी वक्त मिल पायेगा ,.. आभार आप का भ्रमर ५

ANAND PRAVIN के द्वारा
July 5, 2012

आदरणीय भ्रमर सर, सादर प्रणाम सुन्दर और रश युक्त कविता सर…………….गाते गाते पढ़ा मजा आ गया किन्तु इतने सजीले पोस्ट को आपने सादे तौर पर पेश कर दिया सर समझ नहीं आया सुन्दर नारी की साज सज्जा भी तो जरुरी है …………..सुन्दर पोस्ट के लिए बधाई सर

    surendra shukla bhramar5 के द्वारा
    July 5, 2012

    प्रिय प्रवीण जी छवि लगाने पर कहीं आप उसी के आनंद में न खो जाएँ इस लिए सदा ह हा ……रचना अच्छी लगी सुन मन खुश हुआ आभार भ्रमर ५

Mohd Haneef "Ankur" के द्वारा
July 5, 2012

भ्रमर जी, नमस्कार- श्रृंगार रस से सराबोर रचना देकर मंच का वातावरण ही बदल दिया आपने. सुन्दर………….. बधाई……….. इसे भी देखिये. http://hnif.jagranjunction.com/2012/07/04/%E0%A4%A7%E0%A4%B0%E0%A4%A4%E0%A5%80-%E0%A4%AA%E0%A5%81%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A4%BF%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%A8-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%9C%E0%A5%80%E0%A4%B5%E0%A4%A8-%E0%A4%85/#comments

    surendra shukla bhramar5 के द्वारा
    July 5, 2012

    प्रिय अंकुर जी नारी के बिभिन्न रूप रचना दर्शा सकी आप को अच्छी लगी सुन ख़ुशी हुयी आभार भ्रमर ५


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