Bhramar ka 'Dard' aur 'Darpan'

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नयन ‘ग्रन्थ’ अनमोल ‘रतन’ हैं

Posted On: 11 Jul, 2012 Others में

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नयन ‘ग्रन्थ’ अनमोल ‘रतन’ हैं दुनिया इनकी दीवानी
आत्म-ब्रह्म सब ‘भाषा’ पढ़ के डूब गए कितने ज्ञानी
ना भाषा से ना भौगोलिक नहीं कभी ये बंधते
पाखी सा ये मुक्त डोलते हर मन पैठ बनाते
प्रेम संदेसा ज्ञान चक्षु हैं बन त्रिनेत्र स्वाहा भी करते
खंजन नयना मृगनयनी वो सुन्दरता के साक्षी
दो से चार बने तो लगता जनम जनम के साथी

Green_Eyes_by_catsastrofic

इन्द्रधनुष से हैं सतरंगी लाखों रंग समाये
नयनों की भाषा पढ़ लो ‘प्रिय’ दुनिया समझी जाये
प्रेम नयन में क्रोध नयन में घृणा आँख दिखलाती
मन का काम संदेशा देता नयन बांचते पाती
कुछ पल छिन में दोस्त बनें कुछ नयन अगर मिल जाए
दिल के भेद मिटा के यारों अपना ‘दिल’ बन जाएँ
अस्त्र सश्त्र दुश्मन रख देते नैन प्यार जो पा लें
घृणा क्रोध जलता मन देखे नयन उधर ना जाते
गदराये यौवन मूरति, रस -लज्जा नयन छिपाते
सुन्दरता में चाँद चार लग ‘झुक’ नयन पलक छिप जाते
जैसे बदरी घेर सूर्य को लुका छिपी है खेले
नयन हमारे ‘मौन’ प्रेम से ‘भ्रमर’ सभी रस ले लें
मन मस्तिष्क दिल नयन घुसे ये जासूसी सब कर लें
यथा जरूरत बदल रूप ये सम्मोहित कर कब्ज़ा करते
Amber Eye Color - Different types of eyes .jpg
( सभी फोटो गूगल से साभार लिए गए )

नयनों का जादू चलता तो शेर खड़ा मिमियाए
कल का कायर भरे ऊर्जा जंग जीत घर आये
कजरारे, कारे, सुरमा वाले नयन मोह मन लेते
मन में राम बगल में छूरी , ये ‘कटार’ बन ढाते
कभी छलकता प्रेम सिन्धु इस गागर से नयनों में
ना बांधे ना रोके रुकता ‘नयन’ मिले ‘नयनों’ से
नाजुक हैं शीतलता चाहें रोड़ा बड़ा खटकता नैन
भावुक हैं झरने सा झर-झर प्रेम लीन देते सब चैन
प्रणय विरह व्यथा की घड़ियाँ अद्भुत सभी दिखाएँ
रतनारे प्यारे नयना ये भूरे नीले हर पल साथ निभाएं
नयनाभिराम मंच जग प्यारा अद्भुत अभिनय करते नैन
दर्पण बन हर कुछ दिखलाते ‘सांच’ कहें ना डरते नैन
उनके सुख के साथी नयना दुःख में नीर बहा रह जाएँ
जनम जनम की छवि दिखला के भूल कभी ना जाएँ
रतनारे ‘प्रेमी’ नयना ये जामुन जैसे प्रेम भरे रस घोलें
प्रेम के आगे रतन-जवाहर जन-परिजन सब छोड़ें
नयन झरोखे से दिखती सब अपनी राम कहानी
आओ शुद्ध रखें अंतर सब पावन आँख में पानी
झील से नयनों कमल-नयन हैं दुनिया यहीं समायी
प्रेम ‘ग्रन्थ’ लज्जा ‘संस्कृति’ है डूब देख गहराई
नयन पुष्प मादक पराग भर जाम पे जाम पिलाते
मधुशाला मदहोशी में उठा पटक कर नयन खोल भी जाते
संग जीवन भर करें उजाला दीप सरीखे जीवन-ज्योति जगाते
जाते – जाते नैन दान कर दिए रौशनी नयन ‘अमर’ हो जाते !

सुरेन्द्र कुमार शुक्ल ‘भ्रमर’५
कुल्लू यच पी
४.७.१२ ६.४०-७.४० पूर्वाह्न



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37 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
July 20, 2012

बहुत सुन्दर नयन ज्ञान. आदरणीय भ्रमर जी, सादर

nishamittal के द्वारा
July 14, 2012

सुन्दर चित्रों के साथ नयनों की गाथा वर्णित की है आ[पने बधाई

    surendra shukla bhramar5 के द्वारा
    July 16, 2012

    आदरणीया निशा जी आभार आप का प्रोत्साहन हेतु ये रचना नयनों की गाथा सुना आप के मन को छू सके सुन ख़ुशी हुयी आभार भ्रमर ५

R K KHURANA के द्वारा
July 14, 2012

प्रिय भ्रमर जी, नयनो पर सुंदर ग्रन्थ लिखने के लिए बधाई ! राम कृष्ण खुराना

    surendr shukl bhramar5 के द्वारा
    July 14, 2012

    आदरणीय राम कृष्ण खुराना जी स्वागत है आप का और अभिवादन …आप के नैनों को ये नयन ग्रन्थ उनके कारनामे भाये सुन मन हर्षित हुआ अपना स्नेह बनाये रखें ..आप की बधाई सर आँखों पर … भ्रमर ५

ANAND PRAVIN के द्वारा
July 14, 2012

आदरणीय भ्रमर सर, सादर प्रणाम नयन ग्रन्थ के बारे में क्या खूब लिखा है आपने सर नयनों की चित्र भी काफी मनमोहक लग रही है

    surendr shukl bhramar5 के द्वारा
    July 14, 2012

    प्रिय आनंद जी ये रंग बिरंगे जादू भरे नयन आप को भाये और हमारे जे जे परिवार को भी मन खुश हुआ लेकिन जैसा सचिन भाई ने कहा बच के रहना बाबा ठगे मत जाना … भ्रमर ५

allrounder के द्वारा
July 14, 2012

नमस्कार भाई भ्रमर जी, क्या गाथा लिखी आपने नैनों की ! किन्तु भैय्या एक बात सदा याद रखिये ” नैनों की मत सुनियो रे नैनो की मत सुनियो रे, नैना ठग लेंगे ” :) !

    surendr shukl bhramar5 के द्वारा
    July 14, 2012

    प्रिय सचिन भाई आल राउंडर जी आप की एक गेंद कमजोर पड़ी की हमने भी छक्का मार दिया ह हा …आभार आप का नयनों से कैसे बच सकते हैं भाई जी ….हाँ कोशिश तो रहती है की ठग के वे चले न जाएँ … भ्रमर ५

Ramesh Bajpai के द्वारा
July 14, 2012

प्रिय श्री शुक्ल जी इस नयनाभिराम नयनावली के सुरीले भावो को कितने सुन्दर पंख मिले | टॉप पर पहुचने की बधाई ,शुभकानाए ,आशीर्वाद |

    surendr shukl bhramar5 के द्वारा
    July 14, 2012

    आदरणीय बाजपेयी जी आप आये बहार आई आप का स्नेह व् आशीष यों ही मिलता रहे हमारी कलम चलती रहें नयनाभिराम दृश्य बनता रहेगा आभार भ्रमर ५

Rajkamal Sharma के द्वारा
July 13, 2012

आदरणीय भ्रमर जी ….. सादर प्रणाम ! जागरण को भी आपके मतवारे और चंचल नयनों की भाषा समझ में आ गई लगती है इसीलिए यह ब्लॉग टाप पर पहुँच गया है मुबारकबाद स्वीकार करे

    surendr shukl bhramar5 के द्वारा
    July 14, 2012

    आदरणीय राज कमल भ्राता श्री आप के नयनों की तारीफ़ जितनी की जाए कम है टाप तक देख लेते हैं हम तो विशिष्ट तक ही रह जाते हैं आभार आप का शुभ सूचना हेतु .. आप के साथ साथ हमारे सभी प्रिय सुधी पाठक गण और जागरण जंक्शन को भी दिल से आभार .. भ्रमर ५

rajuahuja के द्वारा
July 13, 2012

अखियों को रहने दो अखियों के आस-पास , दूर से दिल की बुझती रहे प्यास ! कुल्लू की मनोरम वादियों से नैनो का परिचय …..अति-उत्तम ! साधुवाद भ्रमर जी !

    surendr shukl bhramar5 के द्वारा
    July 13, 2012

    अखियों को रहने दो अखियों के आस-पास प्रिय राजू आहूजा जी स्वागत है आप का और अभिवादन यहाँ …सुन्दर यादें ..अच्छा गाना याद दिलाया आप ने ..नयन पर तो ग्रन्थ लिखा जा सकता है ..सच ही है … आभार भ्रमर ५

Mohinder Kumar के द्वारा
July 13, 2012

सुरेन्द्र जी, जीवन के सभी रंग इन्हीं नयनों से ही तो हैं… और अगर ये नयन प्रेयसी के हों तो किसी शायर ने क्या खूब कहा है “तेरी आंखों के सिवा दुनिया में रखा क्या है… ये उठें .. सुबह चले… ये झुकें … शाम ढले… मेरा जीना .मेरा मरना.. इनकी पलकों के तले” सुन्दर भाव प्रधान रचना के लिये बधाई.

    surendr shukl bhramar5 के द्वारा
    July 13, 2012

    ये उठें .. सुबह चले… ये झुकें … शाम ढले… मेरा जीना .मेरा मरना.. इनकी पलकों के तले” प्रिय मोहिंदर जी ये आप के रंगीले पं को बखूबी दर्शाता है आइये यों ही प्रेम से सराबोर हो नयनों में खो जाएँ …आभार भ्रमर ५

minujha के द्वारा
July 13, 2012

आपने नैनों को इतना समझा और लिख डाला ,बहुत बङी बात है…,बधाई भ्रमर जी

    surendr shukl bhramar5 के द्वारा
    July 13, 2012

    मीनू जी आभार और अभिवादन नयनों को जानना बहुत ही दुष्कर कार्य है लेकिन जितना ही समझ लिया जाए उतना ही अपने जीवन में कारगर है जय श्री राधे भ्रमर ५

yogi sarswat के द्वारा
July 13, 2012

नयनों का जादू चलता तो शेर खड़ा मिमियाए कल का कायर भरे ऊर्जा जंग जीत घर आये कजरारे, कारे, सुरमा वाले नयन मोह मन लेते मन में राम बगल में छूरी , ये ‘कटार’ बन ढाते कभी छलकता प्रेम सिन्धु इस गागर से नयनों में ना बांधे ना रोके रुकता ‘नयन’ मिले ‘नयनों’ से नाजुक हैं शीतलता चाहें रोड़ा बड़ा खटकता नैन बहुत बहुत सुन्दर रचना श्री भ्रमर साब ! नयनों की मत सुनियो रे , नयना डस लेंगे ! बहुत खूब

    surendr shukl bhramar5 के द्वारा
    July 13, 2012

    नयनों की मत सुनियो रे , नयना डस लेंगे ! प्रिय योगी जी जय श्री राधे ऐसा नहीं है भाई ..नैना तो अपने जादू में आप को उलझा प्रेम रस से सराबोर कर देंगे …धन्यवाद आप का भ्रमर ५

Ramesh Bajpai के द्वारा
July 13, 2012

प्रिय श्री शुक्ल जी इस नयनाभिराम अभिव्यक्ति ने मन को मोह लिया | नयनों का यह शब्द चित्रण सार्थक रहा | “जाते – जाते नैन दान कर ” का भाव तो अद्वितीय हो गया | बधाई ,शुभकामनाये , आशीर्वाद |

    surendr shukl bhramar5 के द्वारा
    July 13, 2012

    आदरणीय बाजपेयी जी इतने दिन बाद आप के दर्शन होने से नयनाभिराम हुआ ..आशा है सब कुशल मंगल …रचना आप के मन को भाई सुन हर्ष हुआ आभार भ्रमर ५

Chandan rai के द्वारा
July 12, 2012

भ्रमर जी, झील से नयनों कमल-नयन हैं दुनिया यहीं समायी प्रेम ‘ग्रन्थ’ लज्जा ‘संस्कृति’ है डूब देख गहराई नयन पुष्प मादक पराग भर जाम पे जाम पिलाते मधुशाला मदहोशी में उठा पटक कर नयन खोल भी जाते अद्भुत पंक्तियाँ , किसके नयन देख अआप ने नयन को यह सुन्दर भेंट दी है , आपकी रचना में किसी के नयन की सुन्दरता है संग जीवन भर करें उजाला दीप सरीखे जीवन-ज्योति जगाते

    surendr shukl bhramar5 के द्वारा
    July 12, 2012

    आपकी रचना में किसी के नयन की सुन्दरता है प्रिय चन्दन जी उन सब के नयनों की जिससे अभी तक नयन मिले हैं मेरा मतलब है आप सभी प्यारे दुलारे मित्रों से जिनकी छवि नयनों में एक बार देखते ही बस जाती है तो भूलती कहाँ है … आभार आप के प्यार के लिए भ्रमर ५

dineshaastik के द्वारा
July 12, 2012

संग जीवन भर करें उजाला दीप सरीखे जीवन-ज्योति जगाते जाते – जाते नैन दान कर दिए रौशनी नयन ‘अमर’ हो जाते ! नयनों की महिमा के वर्णन के साथ सुन्दर संदेश देती हुई प्रस्तुति के लिये बधाई….

    surendra shukla bhramar5 के द्वारा
    July 12, 2012

    प्रिय दिनेश जी आप के नयनों को ये नयना भाये और इस रचना से कुछ सुन्दर सन्देश भी गया सुन ख़ुशी हुयी आभार ..भ्रमर ५

jlsingh के द्वारा
July 12, 2012

रैना बीती जाय, नींदिया न आये! भ्रमर के खातिर नैना खुली रह जाय! महाशय यह ‘नयन ग्रन्थ’ कहाँ पर लिखा ? कुल्लू मनाली की वादियों में…… या सावन में भोले बाबा के त्रिनेत्र देख लिए!… तीन ही आंख दिखाए हैं ,प्रभु जी! नैनो की भाषा समझ लीजिये अब अभिवादन कहने की क्या जरूरत?

    surendra shukla bhramar5 के द्वारा
    July 12, 2012

    जय श्री राधे प्रिय जवाहर जी …आप के नैनों की भाषा समझे आप के नयनों में ये रचना खरी उतरी मेरे नैनों को सुख मिला ..जी हाँ कुल्लू की वादियों में इस का जन्म हुआ ..रचनाओ के साथ उसका जन्म समय स्थान सब लिखा रहता है …आभार आप का प्रभु ..नयनों ने त्रिनेत्र और बहुत से नेत्र देख ही तो लिखे आभार भ्रमर ५

Rajkamal Sharma के द्वारा
July 11, 2012

आँखों की भाषा भी , भाषा अजीब होती है समझ में आ जाए तो अनपढों को भी आ जाती है गर ना समझ में आये तो पढ़े लिखो को भी नहीं आती है इसी लिए कहा गया की ढाई आखर प्रेम का पढ़े सो पंडित होय

    surendra shukla bhramar5 के द्वारा
    July 11, 2012

    हाँ राज भाई …ढाई आखर प्रेम का पढ़े सो पंडित होय…सो तो है ही .. लेकिन नयना बहुत कुछ हाव भाव बिना भाषा जाने ही पढ़ लेते हैं ……समझ जाते हैं ..कह भी जाते हैं …जय श्री राधे ..आभार भ्रमर ५

shashibhushan1959 के द्वारा
July 11, 2012

आदरणीय भ्रमर जी, सादर ! प्रदीप भैया नहीं हैं तो बड़े मजे ले रहे हैं ! हा…हा…हा….! नयनों का इतना सुन्दर और विस्तृत वर्णन ! यह आप ही कर सकते हैं ! अद्भुत ! शानदार ! अंतिम दो पंक्तियों ने मन मोह लिया ! “”संग जीवन भर करें उजाला दीप सरीखे जीवन-ज्योति जगाते जाते – जाते नैन दान कर दिए रौशनी नयन ‘अमर’ हो जाते !”" सादर !

    surendra shukla bhramar5 के द्वारा
    July 11, 2012

    प्रिय शशि भाई एक भाई नहीं तो दूसरे छाये रहते ही हैं फिर भ्रमर को क्या गम गुंजन होता रहे ..मेरा मतलब प्रदीप (जी) नहीं तो शशि (जी) तो अम्बर में उजाला किये ही हुए रहता है …ह हा अंतिम दो पंक्तियाँ हैं ही ऐसी देने वाले का सम्मान सदा होना भी चाहिए ..आभार भ्रमर ५

akraktale के द्वारा
July 11, 2012

भ्रमर जी सादर नमस्कार, संग जीवन भर करें उजाला दीप सरीखे जीवन-ज्योति जगाते जाते – जाते नैन दान कर दिए रौशनी नयन ‘अमर’ हो जाते ! नयनो ही नयनो में आपने बहुत सुन्दर रचना लिख दी है.और अंत में इतना सुन्दर सन्देश, जाते जाते नैन दान कर दिए……… वाह! क्या बात है. जय श्री राधे. बधाई.

    surendra shukla bhramar5 के द्वारा
    July 11, 2012

    जाते जाते नैन दान कर दिए……… वाह! क्या बात है. जय श्री राधे. बधाई. प्रिय अशोक भाई सब दान में ये भी एक महादान हो गया है अब वक्त बताता है क्या होगा …रचना नयनों में आप के जमी नयनों में छा गयी सुन ख़ुशी हुयी भ्रमर ५

Ajay Kumar Dubey के द्वारा
July 11, 2012

क्याययययय आदरणीय भ्रमर जी इतना गूढ़ रहस्य हमारे सामने प्रस्तुत कर देते हैं कि हम मूर्खों के कई फिट ऊपर से ही निकल जाता है अब ये नयनों की भाषा आप ही समझें या आप जैसे अन्य विद्वान…. हमारे वश का तो है नहीं ……

    surendra shukla bhramar5 के द्वारा
    July 11, 2012

    प्रिय दूबे जी आप के नैना सब समझ गए प्यार बरसा गए मन में उतर गयो .. नैनों की भाषा नैन ही जाने प्रभु आभार .. भ्रमर ५


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