Bhramar ka 'Dard' aur 'Darpan'

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नैन चढ़ी काली-काली ये

Posted On: 8 Mar, 2014 social issues,कविता,Others में

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नैन चढ़ी काली-काली ये
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मंत्री जी क़ी नयी नवेली

भैंस बड़ी अलबेली

ऐसी डुबकी मारी भैया

बन गयी अजब पहेली

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घन-घन घंटी बजी रात भर

पुलिस महकमा जाग

होमगार्ड संतरी सेक्रेटरी

एस पी डी एस पी सब भागा

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काला अक्षर भैंस बराबर

काला ही मन भाये

काला कोयला काले धन में

मन जोगी रम जाए

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नैन चढ़ी काली-काली ये

भैंस खोज शुभ लाये

दूध धन्य नेतागिरी में

हुयी वरक्कत नजर नहीं लग पाये

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मंदिर-मस्जिद पूजा -मन्नत

भैंस जल्द मिल जाए

नहीं नौकरी कितनी मुश्किल

गयी ! जेल हो जाए

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आसू सांई नारायण सी भैंसी

गुप्त गुफा पगुराये

ड्राई फ्रूट चबाया जो था

वही हजम हो जाए

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चारा कोई और खा गया

क्या चरने को आये

ए.सी. कूलर हीटर ऊटर

भैंस के मन ना भाये

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काली-काली गाय भैंस सब

हांक -पकड़ कर लाये

कौन गाय हैं भैंस कौन है

अब ये समझ ना आये

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ज्ञानी -ध्यानी कुछ विज्ञानी

टेस्ट परख आजमाए

चुप्पी साधे ‘थी’ मंत्री क़ी

बाकी पशु चिल्लाये

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देशी को है कौन पूछता

ये तो कोई विदेशी होगी

सारा अमला पूछ सरीखा

पीछे-पीछे सदा घूमता

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अब लो दूध पियो हे राजा

बने रहो मुश्तंद

पहलवान के दल में जैम के

कुश्ती दांव दिखाओ रंग

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भूखी -प्यासी जनता बच्चे

दूध -दरश ना पाएं

अंधे-बूढ़े-रोगी जल्दी

सदा पटखनी खाएं

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बलशाली हो चुन के राजा

वे भूखे ही लाएं

जिसकी लाठी भैंस उसी क़ी

कालिदास दे जाएँ

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सुरेन्द्र कुमार शुक्ल भ्रमर ५

७.४०-८.२० पूर्वाह्न

करतारपुर पंजाब

१६.०२.२०१४



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6 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

pkdubey के द्वारा
May 29, 2014

सत्य और अद्भुत सर.

    surendra shukla bhramar5 के द्वारा
    May 29, 2014

    प्रिय दुबे जी आभार प्रोत्साहन हेतु भ्रमर ५

Ramesh Bajpai के द्वारा
March 13, 2014

प्रिय श्री शुक्ल जी व्यवस्था पर चोट करती यह रचना बहुत भायी| बहुत दिनों पर मंच पर आ पाया हु | बधाई

    surendr shukl bhramar5 के द्वारा
    March 13, 2014

    आदरणीय बाजपेयी जी आप कि कमी बहुत खली ..आशा है अब स्नेहाशीष मिलेगा आभार भ्रमर ५

deepakbijnory के द्वारा
March 10, 2014

कमाल कि रचना आदरणीय सुरेन्द्र जी

    surendr shukl bhramar5 के द्वारा
    March 11, 2014

    प्रिय दीपक जी सराहना हेतु आभार …एक शराबी की लत की वजह से बिगड़ता घर परिवार समाज ….आप ने रचना में छिपे दर्द को समझा ख़ुशी हुयी लिखना सार्थक रहा भ्रमर 5


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