Bhramar ka 'Dard' aur 'Darpan'

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लाख हजार दिए विधवा को

Posted On: 8 Apr, 2014 कविता में

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लाख हजार दिए विधवा को
————————-
छल बल सारे अस्त्र से
जनता रहे डराय
बोटी-बोटी काट दूं
जो हमरे आड़े आय
जाति धर्म में बाँट के
हर गुट करते राज
ईमाँ इन्सां जो चले
धोखा हर पल खाय
हम जो चले सफाई देते
सौ सौ प्रश्न लिए आते
उन गुंडों के पास वे
एक नहीं लेकर जाते
आँख तरेरे छीन कैमरा
जान की धमकी दे जाते
अपने विकास को आसमान पे
जनता घुट्टी पिलवाते
राज-नीति अब है गन्दी
‘वे’ मिल हमको लड़वाते
लाख हजार दिए विधवा को
फोटो अपनी छपवाते
कितने मरे -मिले ना अब तक
‘राज’ -राज ये कैसा भारत ?
गर्व करें हम जिस संस्कृति की
आओ झांके क्या ये भारत ?
चीख पुकार शोरगुल भय है
निशि दिन होता अत्याचार
हे ! माँ भारति न्याय कहाँ है ?
क्यों कुनीति दम्भी का राज ?
प्रेम सहिष्णुता दया दबी रे !
सच्चाई का बलात्कार
डर डर जनता खाती जीती
चंहू ओर बस हाहाकार
‘भ्रमर’ कहें जनता जनार्दन
शक्ति अपनी पहचानो
पांच साल से कुम्भकर्ण थे
जागो-देखो-कुछ कर डालो
छल से बच रे ! मीठा बोल
“वोट’ नकेल ‘मगर’ डालो …
—————————–
सुरेन्द्र कुमार शुक्ल ‘भ्रमर ५ ”
जम्मू ३०.०३.२०१४
६.२० -६.५० पूर्वाह्न



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6 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
April 18, 2014

बिलकुल ताज़ा तरीन और समसामयिक ! भ्रमर जी ! बधाई !!

    surendra shukla bhramar5 के द्वारा
    April 19, 2014

    आदरणीय आचार्य जी इस चुनावी महासमर में आप ने इस रचना को सराहा और दर्द को समझा , ख़ुशी हुयी आभार भ्रमर ५

sanjay kumar garg के द्वारा
April 16, 2014

आदरणीय सुरेन्द्र जी! सादर नमन! सुन्दर प्रस्तुति!

    surendra shukla bhramar5 के द्वारा
    April 17, 2014

    प्रिय संजय जी आभार प्रोत्साहन हेतु इस चुनावी माहौल में रचना को आप ने मान दिया अच्छा लगा आभार भ्रमर ५

deepak pande के द्वारा
April 13, 2014

भ्रमर’ कहें जनता जनार्दन शक्ति अपनी पहचानो पांच साल से कुम्भकर्ण थे जागो-देखो-कुछ कर डालो वाह भ्रमर जी अब तो जनता को जागना ही होगा

    surendra shukla bhramar5 के द्वारा
    April 14, 2014

    प्रिय दीपक जी आभार आप का प्रोत्साहन हेतु सच कहा आप ने ..जनता को जागना तो होगा ही भ्रमर ५


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