Bhramar ka 'Dard' aur 'Darpan'

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पूत प्रीत ‘माँ ‘ गंगा तू है --------------------------------

Posted On: 11 May, 2014 Others,social issues,कविता में

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(पूज्या माताश्री और पूज्य पिताजी )

हे माँ तू अमृत घट है री
कण कण मेरे प्राण समायी
मै अबोध बालक हूँ तेरा
पूजूं कैसे तुझको माई
बिन तेरे अस्तित्व कहाँ माँ
बिन तेरे मेरा नाम कहाँ ?
तू है तो ये जग है माता
तू ही मेरी भाग्य विधाता
ऊँगली पकडे साहस देती
दिल धड़के जो धड़कन देती
नब्ज है मेरी सांस भी तू ही
गुण संस्कृति की खान है तू ही
देवी में तू कल्याणी है
प्रकृति पृथिव्या सीता तू है
तू गुलाब है तू सुगंध है
पूत प्रीत ‘माँ ‘ गंगा तू है
धीरज धर्म है साहस तू माँ
लगे चोट मुख निकले माँ माँ
तेरा सम्बल जीवन देता
देख तुझे मै आगे बढ़ता
आँचल तेरा सर है जब तक
नहीं कमी जीवन में तब तक
रश्मि तू सूरज की लाली
बिना स्वार्थ जीवन भर पाली
सारे दर्द बाल के सह के
भूखी प्यासी मेहनत कर के
तूने जो स्थान बनाया
देव मनुज ना कोई पाया
तू मन मस्तिष्क रग रग छायी
पल पल माँ है आँख समायी
आँख सदा बालक पर रखती
पीड़ा पल में जो है हरती
उस माँ को शत नमन हमारा
माँ माँ जपे तभी जग सारा
माँ की ममता बड़ी निराली
तभी तो पूजे जग-कल्याणी
अंत समय तक माँ संग रखना
न हो जुदा दिल में बस रहना
===================
सुरेन्द्र कुमार शुक्ल ‘भ्रमर ‘५
कुल्लू हिमाचल भारत
११-मई -२०१४
रविवार



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22 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

    surendra shukl bhramar5 के द्वारा
    May 20, 2014

    प्रिय योगी जी माँ की ममता अर्चना में लिखी ये रचना आप के मन को छू सकी और आप ने सराहा बहुत अच्छा लगा आभार भ्रमर ५

DR. SHIKHA KAUSHIK के द्वारा
May 15, 2014

mata -pita ko samarpit har rachna mahan hoti hai .aapki yah rachna bhi mahan hai .aabhar

    surendra shukla bhramar5 के द्वारा
    May 16, 2014

    आदरणीया शिखा जी सच कहा आप ने माँ पिता को समर्पित हर रचना महान है हो न क्यों जब माँ पिता ही महान हैं उनके कृत्य महान ….आभार आप का प्रोत्साहन हेतु भ्रमर ५

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
May 15, 2014

आपके माता पिता को शत शत नमन ,बहुत भावनात्मक अभिव्यक्ति माँ को समर्पित की है आपने ,चि.सुरेन्द्रजी .

    surendra shukla bhramar5 के द्वारा
    May 15, 2014

    आदरणीया निर्मला जी आप का बहुत बहुत आभार माँ के स्नेह में लिखी ये रचना आप के मन को छू सकी आप ने माँ पिताजी को नमन किया और आशीष भी दिया दिल गदगद हो गया भ्रमर ५

harirawat के द्वारा
May 12, 2014

बहुत सुन्दर ! माँ का आसाीर्वाद आशीर्वाद माँ के चरणों में है ! साधुवाद ! हरेन्द्र जागतेरहो !

    surendra shukla bhramar5 के द्वारा
    May 12, 2014

    आदरणीय हरेन्द्र जी आशीर्वाद माँ के चरणों में है….सत्य है आभार आप का प्रोत्साहन हेतु भ्रमर५

Sushma Gupta के द्वारा
May 11, 2014

भ्रमर जी , माँ के प्रति अभूतपूर्व सुन्दर भावाव्यक्ति …

    surendra shukla bhramar5 के द्वारा
    May 12, 2014

    आदरणीया सुषमा जी माँ के स्नेह को बखानती ये रचना आप के मन को छू सकी सुन ख़ुशी हुयी आभार भ्रमर ५

alkargupta1 के द्वारा
May 11, 2014

शुक्लाजी , भावपूर्ण उत्कृष्ट भावाभिव्यक्ति माँ से बढ़कर कोई नहीं माँ मैं ही ईश्वरीय सत्ता विद्यमान है ….माँ को श्रद्धापूर्ण नमन

    surendra shukla bhramar5 के द्वारा
    May 12, 2014

    आदरणीया अलका जी बहुत सुन्दर कथन आप का, माँ से बढ़ कोई नहीं उस बिन हमारा अस्तित्व ही कहाँ भ्रमर ५

Santosh Kumar के द्वारा
May 11, 2014

सादर प्रणाम श्रद्धेय ,….. बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति के लिए हार्दिक अभिनन्दन … उस माँ को शत नमन हमारा माँ माँ जपे तभी जग सारा माँ की ममता बड़ी निराली तभी तो पूजे जग-कल्याणी अंत समय तक माँ संग रखना न हो जुदा दिल में बस रहना…………शत शत नमन

    surendra shukla bhramar5 के द्वारा
    May 12, 2014

    जय श्री राधे संतोष जी माँ की ममता में रची इस रचना को आप का समर्थन मिला हार्दिक ख़ुशी हुयी आभार भ्रमर ५

jlsingh के द्वारा
May 11, 2014

सारे दर्द बाल के सह के भूखी प्यासी मेहनत कर के तूने जो स्थान बनाया देव मनुज ना कोई पाया आदरणीय भ्रमर जी, सादर अभिवादन ! हर माँ को वंदन, करे पूत क्रंदन, बिन माँ के देखो ये बेटा अकेला, रोता सिसकता रहे सांध्य बेला. सादर !

    surendra shukla bhramar5 के द्वारा
    May 12, 2014

    प्रिय जवाहर भाई सुन्दर पंक्तियाँ रची आप ने ..हर माँ को वंदन, करे पूत क्रंदन, बिन माँ के देखो ये बेटा अकेला, रोता सिसकता रहे सांध्य बेला. हर माँ को नमन आभार भ्रमर ५

ranjanagupta के द्वारा
May 11, 2014

बहुत मार्मिक और मन को छू लेने वाली अभिव्यक्ति !सादर !बधाई !

    surendra shukla bhramar5 के द्वारा
    May 12, 2014

    आदरणीया रंजना जी माँ का वात्सल्य निराला ही है रचना पर आप का प्रोत्साहन मिला ख़ुशी हुयी आभार भ्रमर ५

May 11, 2014

bahut sundar bhavabhivyakti bhramar ji

    surendra shukla bhramar5 के द्वारा
    May 12, 2014

    आदरणीया शालिनी जी माँ की ममता का बखान ये रचना कर सकी और आप ने सराहा ख़ुशी हुयी आभार भ्रमर ५

rameshbajpai के द्वारा
May 11, 2014

हे माँ तू अमृत घट है री कण कण मेरे प्राण समायी मै अबोध बालक हूँ तेरा पूजूं कैसे तुझको माई बिन तेरे अस्तित्व कहाँ माँ बिन तेरे मेरा नाम कहाँ ? प्रिय श्री शुक्ल जी भावो के मोतियों से सजी माँ की यह अर्चना अमूल्य है | अनमोल है | बहुत सुन्दर |

    surendra shukla bhramar5 के द्वारा
    May 12, 2014

    मै अबोध बालक हूँ तेरा पूजूं कैसे तुझको माई आदरणीय बाजपेयी जी माँ की पूजा में आप का समर्थन मिला बड़ी ख़ुशी हुयी आभार भ्रमर ५


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