Bhramar ka 'Dard' aur 'Darpan'

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बेवफा

Posted On: 25 Nov, 2014 कविता में

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बेवफा ( खेल समझकर दिल क्यों तोड़ जाते हैं वे )
घर फूटा मन टूटा बिच्छिन्न हुए अरमान
मैंने पाया विश्वास गया
ठेस लगी टूटा अभिमान
kulla-nari-kuttam-cinema-032
( photo with thanks from google/net)

एकाकी जीवन रोता दिल
नासूर बनी खिलती कलियाँ
जल जाएँ न सुन विरह गीत
मिट जाएँ न अभिशप्तित परियां
लूट मरोड़ मुकर क्यों जाते
ऐ सनम जो तुझसे दिल न लगाते
बाँध ले घुंघरू तज गेह नेह
सुख भर ले नित दिल टूट देख
ना धूमिल कर छवि नारी की
दिल दे न चढ़े बलि बेचारी
प्यार बना आधार बचाए घर कितने
सोने पर सोना छोड़
ले देख जरा तुझसे कितने

सुरेन्द्र कुमार शुक्ल भ्रमर ५
राय बरेली – प्रतापगढ़

७.९.१९९३

दे ऐसा आशीष मुझे माँ आँखों का तारा बन जाऊं



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