Bhramar ka 'Dard' aur 'Darpan'

this blog contains the pain of society. different colours of life.feelings and as seen from my own eyes .title ..as Naari..Pagli.. koyala.sukhi roti..ghav bana nasoor..ras-rang etc etc

296 Posts

4693 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 4641 postid : 865919

बस दो दिन और....

Posted On: 1 Apr, 2015 Others,social issues,Hindi Sahitya में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

खाना खाना। अम्मी खाना दे न ! चिड़चिड़ाता काँपता बच्चा अब चीखने लगा था — महीनों से दौड़ी भागी थकी हारी माँ का सपना टूट चुका था -छोटा बच्चा रोये जा रहा था। गर्म बदन तेज चलती साँसे नींद उड़ा रही थी काले बादल छंटते से दिख रहे थे। भोर का उजाला कुछ कुछ आस बंधा रहा था किरण आएगी तो कुछ न कुछ तो जीवन मिलेगा ही , गोद में सिर रखे बच्चे को थपकी देती विमला ढांढस बंधाती जीवन दान देती जा रही थी। माँ जो है न !

अपनी बपौती खुले आसमान , पेड़ के नीचे दो पीढ़ी से तो यहीं जमी थी , सास ससुर पति यहीं — इसी जगह से अलविदा —

तभी विजली चमकी तेज बूँदें -एक पोटली – भीगता कम्बल — मुन्ने को लिए वो रेन बसेरा की तरफ भागी –

हालत बदलेंगे , कालोनी बनेगी , अपने सिर पर छत होगी , लाखों कैमरे होंगे अपनी गरीबी देखेंगे , कम्प्यूटर पर खाना होगा , पकवान , दवाई —

ठोकर लगी , गिरी विमला उठी , …रैन बसेरे में भीड़ , कोई पाँव फैला चुका था –

पैर एक कोने घसीट , भीगा कम्बल मुन्ने को ओढाती वो फफक फफक रो पड़ी , बस दो दिनों में वोटों की

गिनती —

अम्मी दो दिन में तो मै भूखा मर —–

चुप कर — उसके होंठ उँगलियों से बंद करती विमला सिसक पड़ी —

बस दो दिन और जी ले मेरे मुन्ने —

सुरेन्द्र कुमार शुक्ल भ्रमर ५

6. २ ० -6 . 3 8 पूर्वाहन

रविवार ८/२/२०१५

कुल्लू हिमाचल प्रदेश भारत

दे ऐसा आशीष मुझे माँ आँखों का तारा बन जाऊं



Tags:           

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading ... Loading ...

4 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

DR. SHIKHA KAUSHIK के द्वारा
April 4, 2015

जीवन की वास्तविकता से रूबरू कराती रचना .आभार

    shuklabhramar5 के द्वारा
    April 9, 2015

    शिखा जी इस लघु लेख ने आप के मन को छुवा सुन ख़ुशी हुयी आभार भ्रमर ५

jlsingh के द्वारा
April 1, 2015

दो दिन और …बड़ी ही मर्मान्तक चित्रण किया आपने आदरणीय भ्रमर जी, अगर देख जाय तो अधिकांश लोग इसी दो दिन की आश लगाये जिए जा रहे हैं…..सादर!

    s k shukla bhramar5 के द्वारा
    April 2, 2015

    प्रिय जवाहर भाई रचना आम के दर्द को दिखा सकी और आप से प्रोत्साहन मिला ख़ुशी हुयी आभार


topic of the week



latest from jagran