Bhramar ka 'Dard' aur 'Darpan'

this blog contains the pain of society. different colours of life.feelings and as seen from my own eyes .title ..as Naari..Pagli.. koyala.sukhi roti..ghav bana nasoor..ras-rang etc etc

297 Posts

4694 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 4641 postid : 879931

मन की बात

Posted On: 2 May, 2015 Others,social issues,कविता में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

आओ भ्रष्टाचारी भाई
निज मन में तुम झांको
भारत देश है क्यों कर पिछड़ा
मानचित्र में- आंको
——————————–
बदहाली बेहाली शिक्षा
अंधकार घर दूर है शिक्षा
टूटी सड़कें ढहे हुए पल
करें इशारा भ्रष्ट काल-कुल
—————————–
छीन झपट कर जोड़े जाते
शीश महल -पर नहीं अघाते
स्नेह गया ना लाज हया
व्यथित ह्रदय मुरझा चेहरा
——————————–
भोले प्यारे बच्चे अपने
भाएं अच्छी मन की बात
दुर्गुण करनी तेरी , अपने -
काहे लादें सर पे पाप ?
—————————-

‘चोर’ बना जिनकी खातिर
कल काला मुख कर लेप करें
माँ बाप न मानें मै शातिर
मुंह फेर चलेंगे छोड़ तुझे
—————————-
ना बो कंटक तू फूल बिछा
क्यों ह्रदय घात फांसी मांगे
सतकर्म करे प्रभु सभी रिझा
पल दो पल जी खुशियाँ मांगे
—————————–
ये महल दुमहले माया सब
कब धूल -ढेर माटी मिलते
प्रेम -पुण्य यादें सुन्दर
सतकर्म आत्म जाएँ संग में
——————————-
सुरेन्द्र कुमार शुक्ल भ्रमर ५
कुल्लू हिमाचल भारत
२६.४.२०१५
२.२० मध्याह्न



Tags:           

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (1 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

4 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

    surendra shukla bhramar5 के द्वारा
    May 6, 2015

    प्रिय गुरु जी ..जय श्री राधे बहुत दिन बाद दर्शन.. रचना की ये पंक्तियाँ आप के मन को भायीं अच्छा लगा प्रोत्साहन हेतु आभार भ्रमर ५

jlsingh के द्वारा
May 3, 2015

ना बो कंटक तू फूल बिछा क्यों ह्रदय घात फांसी मांगे सतकर्म करे प्रभु सभी रिझा पल दो पल जी खुशियाँ मांगे —————————– ये महल दुमहले माया सब कब धूल -ढेर माटी मिलते प्रेम -पुण्य यादें सुन्दर सतकर्म आत्म जाएँ संग में अच्छी सीख देती खूबसूरत पंक्तियाँ आदरणीय भ्रमर जी!

    surendra shukla bhramar5 के द्वारा
    May 4, 2015

    प्रिय जवाहर भाई रचना की ये पंक्तियाँ तो जीवन दर्शन को सिखाती ही हैं आप को अच्छी लगीं आप ने सराहा मन खुश हुआ आभार भ्रमर ५


topic of the week



latest from jagran