Bhramar ka 'Dard' aur 'Darpan'

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अच्छा लगता सब कुछ- जैसे माँ की लोरी

Posted On: 23 May, 2015 Others,social issues,कविता में

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अच्छा लगता सब कुछ- जैसे माँ की लोरी
गिरि की खोह से निकला सूरज
स्वर्ण रश्मियाँ ज्यों सोना बरसाईं
हुआ उजाला चमक उठा सब
चिड़ियाँ चहकीं अंगड़ाई ले जागा नीरज
——————————————
खिले फूल बहुरंगी प्यारे
खिले-खिले हर चेहरे न्यारे
रंग बिरंगी तितली मन को चली उड़ाए
पंख लगा मन भर ‘कुबेर’ सा फूल रहा रे !
—————————————-
बहुत सुहानी मन-हर वायु जैसे अमृत
नदी पहाड़ से उड़ -उड़ आती
जान फूंक देती प्राणी या कोई चराचर
हिंडोले में सावन जैसे गजब झुलाती !
——————————————
आओ घूमें उठ के सुबह सवेरे नित ही
भरें ऊर्जा ओज योग आसन में रम जाएँ
भौतिक से कुछ सूक्ष्म जगत परमात्म ओर भी-
मन लाएं ! सुंदर सुविचार कर्म क्षेत्र क्षेत्र ले जुट जाएँ
——————————————————
घर आँगन परिवार हमारे सखा -सहेली
कितने प्यारे मन को सारे लगे दुलारे
अच्छा लगता सब कुछ जैसे माँ की लोरी
संयम साहस संस्कार ले जीत जहां रे !
——————————————
आओ अपना लें सब अच्छा दुर्गुण छोड़ें
सच ईमान को अंग बना लें रहें ख़ुशी
दिव्यानंद समाये मन में हाथ मिला लें
सब को गले लगा रे प्यारे , ना धन-निर्धन दीन दुखी
===================================
सुरेन्द्र कुमार शुक्ल भ्रमर ५
१-५-२०१५ श्रमिक दिवस
कुल्लू हिमाचल



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4 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

jlsingh के द्वारा
May 27, 2015

आदरणीय भ्रमर जी,सादर अभिवादन! आप प्रकृति को इतना ध्यान से देखते हैं निरीक्षण करते हैं कि जैसे हर प्राकृतिक वस्तुएं आपसे बात कर रही होती है और आप उनसे वार्तालाप करते हुए पंक्तियाँ गढ़ लेते हैं जो एक खूबसूरत कविता का रूप ले लेती है. शुरुआत ही सुप्रभात के पंक्तियाँ क्या कुछ नहीं कह जाती है – गिरि की खोह से निकला सूरज स्वर्ण रश्मियाँ ज्यों सोना बरसाईं हुआ उजाला चमक उठा सब चिड़ियाँ चहकीं अंगड़ाई ले जागा नीरज क्या कहने हैं! हर पंक्ति लाजवाब! जैसे हो कोई मधुर ख्वाब! सादर!

    shuklabhramar5 के द्वारा
    May 28, 2015

    प्रिय जवाहर भाई रचना आप ने मन से पढ़ी और हिमाचल की पहाड़ी वादियों में खो आनंद लिए प्रोत्साहन दिए बड़ी ख़ुशी हुयी बहुत बहुत आभार भ्रमर ५

Shobha के द्वारा
May 27, 2015

श्री सुरेन्द्र जी बहुत सुंदर कविता परन्तु प्रतिक्रिया आप तक नहीं पहुंच रही है

    surendra shukla bhramar5 के द्वारा
    May 27, 2015

    आदरणीया शोभा जी रचना आप के मन को छु सकी और आप ने सराहा अच्छा लगा आभार भ्रमर ५


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