Bhramar ka 'Dard' aur 'Darpan'

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आओ हम प्रातः उठ जाएँ

Posted On: 30 Sep, 2015 Others,कविता,Hindi Sahitya में

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आओ हम प्रातः उठ जाएँ
दोनों कर नैन भरे देखें
लक्ष्मी शारद सब दर्शन पाएं
माँ-पृथ्वी के हम गले लगें
भजन कीर्तन जुड़ प्रभु से
कुछ योग-ध्यान में खो जाएँ
ले दिव्य दृष्टि पाएं प्रभु को
जीवन को अपने सफल बनायें
आओ हम प्रातः उठ जाएँ
प्रातः वेला में घूम -टहल
देखें कलरव हर चहल पहल
जब खिलें पुष्प या पंकज दल
मन-हर माँ प्रकृति के सुखकर दृश्य
ले श्वांस तेज सब दिल में भर
मुस्काते -हँसते दिन-रैना
जीवन को अपने सफल बनायें
आओ हम प्रातः उठ जाएँ
==================
कुछ पुण्य करें कुछ दान करें
चिड़िया कौओं का ध्यान रखें
माँ-गौ माता को नमन करें
शीतल जल कुछ तो दे आएं
जो असहाय कहीं दुर्बल हैं
कुछ अंश प्रभु का दे आएं
ऊर्जा ऊष्मा आशीष सभी के
जीवन को अपने दिव्य बनायें
मुख -मंडल जब आभा अपने
मन ख़ुशी सभी को खुश रख के
हर कार्य सफलता पा जाएँ
आओ हम प्रातः उठ जाएँ
======================
हम स्वच्छ रहें परिवेश स्वच्छ
नित साफ़ सफाई मन लाएं
आरती वंदन मंदिर मस्जिद
गुरूद्वारे-चर्च कहीं जाएँ
है कोई करे नियंत्रित सब
हम प्रेम करें रखें कुछ भय
उस प्रभु में खो जाएँ पल -छिन
विचरें हम शून्य व् सूक्ष्म जगत
शुभ सुन्दर सच का करें वरन
जीवन आओ हम सफल बनायें
आओ हम प्रातः उठ जाएँ
==================
सुरेन्द्र कुमार शुक्ल भ्रमर ५
२०-९-२०१५
रविवार
३.४२-४.४२ पूर्वाह्न
कुल्लू हिमाचल प्रदेश भारत



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3 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Shobha के द्वारा
October 5, 2015

श्री सुरेन्द्र जी बहुत दिनों बाद आपके द्वारा लिखा देखा बहुत सुंदर कविता सुबह उठने के महत्व को आपने बड़े भाव पूर्ण ढंग से समझाया है कुछ पुण्य करें कुछ दान करें चिड़िया कौओं का ध्यान रखें माँ-गौ माता को नमन करें शीतल जल कुछ तो दे आएं इससे बड़ा पुण्य कहां है सुंदर भाव पूर्ण कविता

yamunapathak के द्वारा
October 4, 2015

सुन्दर भाव लिए सुन्दर कविता भ्रमर जी आभार

jlsingh के द्वारा
October 2, 2015

वह वह बहुत सुन्दर आदरणीय भ्रमर जी, काफी दिनों बाद आपने सभी रसों से युक्त कविता का सृजन कहै. सौंदर्य, भक्ति, सव्स्थ्य, प्रकृति सबकुछ मन को सुकून देनेवाला …निश्चित ही प्रात; जागरण, भ्रमण, प्राणायाम, व्यय्यम और ध्यान श्रेष्ठता की निशानी है… पर हम लोग रोटी -दाल के चक्कर में पालियों में काम करनेवाले अनियमित हो जाते हैं. क्या करें!


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