Bhramar ka 'Dard' aur 'Darpan'

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आओ प्रियवर स्वागत कर लें (नए वर्ष का)

Posted On: 2 Jan, 2016 कविता में

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आओ प्रियवर स्वागत कर लें (नए वर्ष का)

नव विहान में नयी ताजगी कण कण भर लें
दिल दिमाग मन मुक्त भाव से
नेह करें हम गले लगाएं शुभ सब लाएं
ऊषा सज-धज स्वागत करती देखो आई
नूपुर छन-छन स्वर्ण रश्मियाँ धरती लाई
जंगल-मंगल , हिम आच्छादित श्वेत पहाड़ी
खिले फूल मन-हर झरने हैं बदली छाई
रंग-बिरंगी ! अमृत वर्षा -नयी कहानी रचने आई
कल जो स्याह अँधेरा-धुंधला धोने आयी
नया उजाला भर के राह दिखाने आयी
मन-मौसम सच सब है बदला खुशियाँ छाई
आओ भर लें जोश होश से रचते जाएँ
थकें नहीं -दें दान-न छीने तो सुख पाएं
जो भटके हैं भ्रमित हुए पथ -गेह -नेह से फिर आ जाएँ
ना हो भय आतंक कहीं भी -शान्ति सुकूँ से सब सो पायें
स्वच्छ रखें परिवेश -स्वच्छ तो तन मन अपना
विश्व गुरू बन राज करें हम पूरा कर लें अपना सपना
मूल-भूत सारी सुविधाएँ जब हर जन पाएं
सम समाज हो कमल दिलों का खिलता जाए
सुरेन्द्र कुमार शुक्ल ‘भ्रमर ५’
कुल्लू-मनाली
हिमाचल

१-१-२०१६ , ८-५५ पूर्वाह्न



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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Shobha के द्वारा
January 6, 2016

श्री सुरेन्द्र जी बहुत सुंदर कविता ना हो भय आतंक कहीं भी -शान्ति सुकूँ से सब सो पायें स्वच्छ रखें परिवेश -स्वच्छ तो तन मन अपना क्या सम्भव हो सकेगा

    surendra shukla bhramar5 के द्वारा
    January 6, 2016

    आदरणीया शोभा जी हार्दिक आभार प्रोत्साहन और त्वरित प्रतिक्रिया हेतु ..अपने हाथ में है ही क्या धनात्मक सोच और लोगो को अच्छे काम के लिए प्रोत्साहित करना सब शुभ हो …जय श्री राधे भ्रमर ५


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