Bhramar ka 'Dard' aur 'Darpan'

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मेरे घर के बगल कौन है ?

Posted On: 29 Feb, 2016 कविता में

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मेरे घर के बगल कौन है ?
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मेरे घर के बगल कौन है ?
सन्त महाजन या आतंकी
मंथन आओ कर लें प्यारे
भूख है हम को कितनी धन की ,,,
======================
प्रेम क्रोध या घृणा ईर्ष्या
जांचो परखो क्या कुछ देते
मारो-काटो ले लो बदला ??
जीवन क्षण भंगुर कर देते ..
========================
मानव योनि है दुष्कर पाए
संस्कार भारत भू आये
अच्छा -अच्छाई आ चुन लें
घर आँगन से नीव ये रख लें ..
==========================
मात-पिता सन्तति मन झांकें
सखा भाव रख मन को आंकें
कौन कोयला- हीरा परखें
बनें जौहरी सदा तराशें …
=======================
अन्धकार जब बंद द्वार हों
निरखें आओ भरें उजाला
नफरत घृणा अकेलेपन को
दूर करें रख भाई चारा ..
========================
बारूदों विस्फोट में जल-जल
क्यों मरते घुट जलते तिल-तिल
ज्वालाओं से जल सब हारा
खो अपना जग कौन है जीता …
——————————————–
सुरेन्द्र कुमार शुक्ल भ्रमर ५
कुल्लू हिमाचल भारत
२५-जनवरी -२०१६



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5 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

surendra shukla bhramar5 के द्वारा
March 5, 2016

आदरणीय समर कवीर जी …बहुत बहुत आभार आप का …आज के समसामयिक विषय पर रची ये रचना आप के मन को छू सकी और आप ने इसे सराहा बहुत अच्छा लगा कृपया अपना मार्ग दर्शन बनाये रखें भ्रमर ५

Shobha के द्वारा
March 4, 2016

श्री सुरेन्द्र जी बहुत सुंदर भाव पूर्ण रचना आप कुछ समय से ब्लॉग पर नहीं थे आज आपकी रचना पढ़ कर बहुत ख़ुशी हुई अन्धकार जब बंद द्वार हों निरखें आओ भरें उजाला नफरत घृणा अकेलेपन को दूर करें रख भाई चारा ..अति सुंदर

    surendra shukla bhramar5 के द्वारा
    March 5, 2016

    आदरणीया शोभा जी आज के सम सामयिक विषय को लिए इस रचना को आप ने सराहा बहुत ख़ुशी हुयी अपना आशीर्वाद बनाये रखें व्यस्तता की वजह से बहुत ही कम भाग ले पाता हूँ भ्रमर ५

jlsingh के द्वारा
March 2, 2016

बारूदी विस्फोट में जल-जल क्यों मरते घुट जलते तिल-तिल ज्वालाओं से जल सब हारा खो अपना जग कौन है जीता … धर्मराज सा रीता रीता प्रेम सुधा रस क्यों न पीता क्या लेकर के तुम आये हो क्या लेकर है तुमको जाना राम नाम को जप ले प्यारे नहीं चलेगा कोई बहाना आदरणीय बड़े भाई, भ्रमर जी आपकी कविता को थोड़ा आगे बढ़ाने की कोशिश की है …कृपया अन्यथा न लें. कुछ भाव थे मन में जो आपकी कविता के बहाव में आगे बढ़ गए. सादर!

    surendra kumar shukl के द्वारा
    March 3, 2016

    जय श्री राधे जवाहर भाई ..आनंद दाई प्रभु …सुन्दर रचा आप ने अब ये भी इस रचना के साथ ही रहेगी ..


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