Bhramar ka 'Dard' aur 'Darpan'

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जाने क्यों आती है खुशियां

Posted On 6 May, 2016 Hindi Sahitya, कविता में

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जाने क्यों आती है खुशियां
हरी भरी बगिया उपवन सब
गिरि कानन सब शांत खड़े थे
जोह रहे ज्यों बाट क्लांत मन
स्वागत आतुर बड़े खड़े थे
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आह्लादित भी मन में तन में
इंतजार कर ऊब रहे थे
लाखों सपने नैना तरते
पुलकित हो बस सोच रहे थे
==========================
रोमांचित मन सिरहन वे पल
साँसे लम्बी कुछ पीड़ा थी
उपजी प्रकृति मूर्त रूप वो
बढ़ती सम्मुख सुख बेला थी
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गात हुए मन हहर – हहर कर
गोदी भर- भर खूब दुलारे
मन करता बस हृदय में भरकर
मूंदे नैना स्नेह लुटा दे
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हलचल बड़ी अनोखी अब तो
पकडे ऊँगली हमें खिलाती
नाना रूप धरे बचपन के
बड़ी छकाती- खूब हंसाती -कभी रुलाती
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बड़ी हुई यौवन रस छलका
मलयानिल खुशबू ले धायी
चारों ओर नशा मादकता
नृत्य खुमारी हर मन छाई
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प्रेम पगा हर मन में खुशियां
चाह हमारी बन रह जाये
मधुर-मधुर सुर की मलिका वो
जीवन- संगीत मेरे संग गाए
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पगली बदली नयनन सर सरके
अल्हड सरिता सी बहती जाये
साध निशाना काम-रति के
छलनी दिल के अति मन भाये
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किये कल्पना नयनन आती
दिल में वो गुदगुदी मचाती
मूक अवाक् ये आनन्दित मन
नाच उठे जब रास रचाती
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गिरि कानन तरुवर सब झूमे
फुल्ल कुसुम शोभित रस फूले
आनंदी संग पेंच पतंगे
ज्यों सावन के पड़े हो झूले
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मन मयूर हर क्षण अब नाचे
नया नया सा हर कुछ लागे
रूप निखर बहु बाण चलाये
हर मन ईर्ष्या भर भी जाये
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ये स्वतंत्र स्वछन्द बहुत है
हाथ किसी के ना आएगी
परी खूबसूरत पंछी है
तड़पा करके उड़ जाएगी
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उसका कोमल गात है प्यारा
छूकर हरे वेदना सारी
चन्दन सी जाएगी महका
घर आँगन फुलवारी सारी
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आलिंगन कर गदगद करती
जिया हिया हर पैठ बनाती
झांके नैनो में कुछ कहती
छूट न जाये कोई भी ‘प्रिय’ -बढ़ती जाती
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ह्रदय सिंधु फिर रोक न पाया
लहरें हहर उठी अंतर में
अरे ! विदाई का क्षण आया
फूटा झरना नयनन मन से
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जाने क्यों आती है खुशियां
खुश करके फिर बड़ा रुलाती
परिवर्तन ही नियम प्रकृति का
उपजे खेले फिर मिट जाती
===========================
सुरेन्द्र कुमार शुक्ल भ्रमर ५
५/५/२०१६ ५.४० अपराह्न
कुल्लू हिमाचल प्रदेश .

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4 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Jitendra Mathur के द्वारा
May 10, 2016

अति सुंदर कविता । हृदय को विजित कर लेने वाली । आभार एवं अभिनंदन ।

    surendra shukla bhramar5 के द्वारा
    May 17, 2016

    माथुर जी अभिनन्दन है आप का यहां …कविता ने आप के दिल को छुआ सुन बड़ी ख़ुशी हुयी प्रोत्साहन की अपेक्षा यूँ ही रहेगी भ्रमर ५

Shobha के द्वारा
May 6, 2016

श्री शुक्ल जी सम्पूर्ण कविता अति सुंदर सरस यह पंक्तियां ‘आह्लादित भी मन में तन में इंतजार कर ऊब रहे थे लाखों सपने नैना तरते पुलकित हो बस सोच रहे थे’ आपका अंतर्मन दर्शाता है

    surendra shukla bhramar5 के द्वारा
    May 7, 2016

    आदरणीया शोभा जी रचना को आप ने रूचि ले गूढ़ता से पढ़ा और आह्लादित हो समीक्षा भी की ख़ुशी हुयी आप का बहुत बहुत आभार भ्रमर ५


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