Bhramar ka 'Dard' aur 'Darpan'

this blog contains the pain of society. different colours of life.feelings and as seen from my own eyes .title ..as Naari..Pagli.. koyala.sukhi roti..ghav bana nasoor..ras-rang etc etc

297 Posts

4693 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 4641 postid : 1189630

खिली खिली खिलखिला उठूँ मैं जब से उसने मुझको देखा …

Posted On 14 Jun, 2016 Hindi Sahitya, कविता में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

खिली खिली खिलखिला उठूँ मैं
जब से उसने मुझको देखा …
================
कोमल गात हमारे सिहरन
छुई मुई सा होता तन मन
उन नयनों की भाषा उलझन
उचटी नींदें निशि दिन चिंतन
मूँदूँ नैना चित उस चितवन ….
खुद बतियाती गाती हूँ मैं ….
खिली खिली खिलखिला उठूँ मैं
जब से उसने मुझको देखा …

होंठ रसीले मधु छलकाते
अमृत घट ज्यों -भौंरे आते
ग्रीवा-गिरि-कटि-नाभि उतर के
बूँद-सरोवर-झील नहाते
मस्त मदन रति क्रीड़ा देखे ……..
छक मदिरा पी लड़खड़ा उठूँ मैं………
खिली खिली खिलखिला उठूँ मैं
जब से उसने मुझको देखा …

काया कंचन चाँद सा मुखड़ा
प्रेम सरोवर हंस वो उजला
अठखेली कर मोती चुगता
लहर लहर बुनता दिल सुनता
बात बनी रे ! रात पूर्णिमा …
ज्वार सरीखी चढ़ जाऊं मैं …
खिली खिली खिलखिला उठूँ मैं
जब से उसने मुझको देखा …

लहर लहर लहरा जाऊं मैं
भटकी-खोती-पा जाऊं मैं
चूम-चूम उड़ छा जाऊं मैं
बदली-कितनी-शरमाऊं मैं
बांह पसारे आलिंगन कर …
दर्पण देख लजा जाऊं मैं …
खिली खिली खिलखिला उठूँ मैं
जब से उसने मुझको देखा …

अब पराग रस छलक उठा है
पोर-पोर हर महक उठा है
कस्तूरी मृग जान चुका है
दस्तक दिल पहचान चुका है
नैनों की भाषा पढ़ पढ़ के …
जी भर अब मुस्काऊँ मैं
खिली खिली खिलखिला उठूँ मैं
जब से उसने मुझको देखा …

सुरेन्द्र कुमार शुक्ल भ्रमर ५
११.३० -१२.१० मध्याह्न
२.६.२०१६

कुल्लू हिमाचल भारत



Tags:               

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (1 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

8 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Alka के द्वारा
August 19, 2016

आदरणीय भ्रमर जी . सौंदर्य और प्रेम रस में पगी अति सुन्दर कविता | शब्द चयन अति उत्तम है | अति सुन्दर ….

    surendra shukla bhramar5 के द्वारा
    September 25, 2016

    आदरणीया अलका जी स्वागत है आप का …कविता को आप ने सराहा मन आप का भी खिला सुन ख़ुशी हुयी ..आप का बहुत बहुत आभार …. भ्रमर 5

harirawat के द्वारा
June 19, 2016

शुक्ला जी, कविता पढ़ी, क्या उड़ान भरते हैं आप, किसी ने कभी ठीक ही कहा था “जहां न जाए रवि, वहां जाए कवी” ! साधुवाद ! जागते रहो !

    surendra shukla bhramar5 के द्वारा
    June 22, 2016

    आदरणीय रावत जी जय श्री राधे बहुत सुन्दर कहा आप ने कल्पनाएं सपने हमें कहाँ से कहाँ ले जाते हैं और हम आनंद में गोते लगा ही लेते हैं ..प्रोत्साहन बनाए रखिये भ्रमर ५

Shobha के द्वारा
June 16, 2016

श्री शुक्ला जी सुंदर भावों से परिपूर्ण कविता कितनी प्रशंसा करूं कम है “अति सुंदर वर्णन ” अब पराग रस छलक उठा है पोर-पोर हर महक उठा है कस्तूरी मृग जान चुका है दस्तक दिल पहचान चुका है नैनों की भाषा पढ़ पढ़ के … जी भर अब मुस्काऊँ मैं मुझे कविता लिखनी नहीं आती लेकिन उत्तम कविता की पहचान है

    jlsingh के द्वारा
    June 17, 2016

    आदरणीया शोभा जी, आपको कविता की पहचान है और कविवर भ्रमर साहब को सौंदर्य की पहचान है. ये पहाड़ियों की वादियों की सुंदरता को हरसमभए अपनी लेखनी में व्यक्त करते रहते हैं. और तो और ये जहाँ कहीं भी जाते हैं, इनका कवि मन मचल उठता है और लेखनी कागजो पर नृत्य करने लग जाती है, भ्रमर उपनाम को सार्थक करते हुए रसपान करते और करते रहते हैं. भ्रमर जी की लेखनी को नमन!

    surendra shukla bhramar5 के द्वारा
    June 17, 2016

    आदरणीया शोभा जी सौंदर्य रस से युक्त ये रचना आप के मन को छू सकी और और आप ने सराहा प्रोत्साहन दिया बड़ा अच्छा लगा आप के लेख और रचनाओं का तो जबाब नहीं ..राधे राधे

    surendra shukla bhramar5 के द्वारा
    June 17, 2016

    प्रिय जवाहर भाई आप के शब्द तो दिल को छू जाते हैं लेखनी के धनी आप लोगों से बस सीखता हूँ आप सब को पढता हूँ उसी में आनंद है भ्रमर तो सच में कभी कभी न जाने कहाँ रस में खो जाता है जो मधु मिठास मकरंद पाता है बस यूं ही उड़ेल देता है शायद अन्य के काम भी कुछ आये .. जय श्री राधे भ्रमर ५


topic of the week



latest from jagran